नेशनल डेस्क। दुर्ग जिले की बेटी सुष्मिता सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2025 में शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। यूपीएससी द्वारा जारी अंतिम परिणाम में उन्होंने ऑल इंडिया 32वीं रैंक प्राप्त की है। भिलाई निवासी सुष्मिता सिंह की इस उपलब्धि के बाद पूरे दुर्ग जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। परिवार, रिश्तेदारों और शिक्षकों में जश्न का माहौल है। उनकी सफलता को युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।
दुर्ग जिले की बेटी सुष्मिता सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2025 में शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। यूपीएससी द्वारा जारी अंतिम परिणाम में उन्होंने ऑल इंडिया 32वीं रैंक प्राप्त की, जिससे पूरे छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गई। भिलाई निवासी सुष्मिता सिंह की इस उपलब्धि से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे दुर्ग जिले में उत्सव जैसा माहौल है। तकनीकी शिक्षा के बाद सुरक्षित नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की कठिन राह चुनने वाली सुष्मिता की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल बन गई है।
भिलाई से दिल्ली तक का सफर- बीटेक इंजीनियरिंग करने के बाद सुष्मिता ने कुछ समय तक नौकरी भी की, लेकिन उनका लक्ष्य हमेशा बड़ा था। समाज और प्रकृति के लिए कुछ सार्थक करने की इच्छा ने उन्हें सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया। उनके पिता के विचारों और मार्गदर्शन ने इस सफर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नौकरी छोड़ी और UPSC पर किया फोकस- सुष्मिता ने सुरक्षित नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू की। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने पूरी लगन और आत्मविश्वास के साथ तैयारी जारी रखी। उन्होंने लगातार अनुशासन और कड़ी मेहनत को अपनी ताकत बनाया।
असफलताओं से मिली सीख- UPSC जैसी कठिन परीक्षा में उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर असफल प्रयास को उन्होंने सीख के रूप में अपनाया और अपनी रणनीति में सुधार किया।
छठे प्रयास में मिली बड़ी सफलता- लगातार संघर्ष के बाद सुष्मिता सिंह ने अपने छठे प्रयास में भारतीय वन सेवा (IFS) में चयन हासिल किया और AIR 32 रैंक प्राप्त की। यह सफलता उनके धैर्य और मेहनत का परिणाम है।
युवाओं के लिए प्रेरणा- सुष्मिता का कहना है कि सफलता के लिए धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि असफलताओं से घबराने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बनाएं। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बन गई है।