पीरियड्स में भी रख सकती हैं वट सावित्री व्रत, जानिए पूजा से जुड़े जरूरी नियम
वट सावित्री व्रत: वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास पर्व माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। लेकिन कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि अगर व्रत वाले दिन पीरियड्स आ जाएं तो क्या पूजा और व्रत किया जा सकता है। धार्मिक जानकारों के अनुसार पीरियड्स के दौरान भी महिलाएं वट सावित्री व्रत रख सकती हैं। महिलाएं स्नान कर मन में व्रत का संकल्प ले सकती हैं और पूरे दिन उपवास रख सकती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया व्रत भगवान तक अवश्य पहुंचता है।
वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। इस वर्ष वट सावित्री व्रत 16 मई को मनाया जाएगा। ऐसे में कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि अगर व्रत वाले दिन पीरियड्स आ जाएं तो क्या पूजा और व्रत किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीरियड्स के दौरान भी महिलाएं वट सावित्री व्रत रख सकती हैं। महिलाएं स्नान कर मन में व्रत का संकल्प लेकर पूरे दिन उपवास कर सकती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया व्रत भगवान तक जरूर पहुंचता है।
पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान- धार्मिक जानकारों के मुताबिक पीरियड्स के दौरान पूजा सामग्री और भगवान की मूर्ति को सीधे हाथ लगाने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में परिवार की किसी अन्य सुहागिन महिला की मदद ली जा सकती है। पूजा की थाली, फल-फूल और अन्य सामग्री दूसरे सदस्य से तैयार करवाई जा सकती है।
वट वृक्ष की पूजा कैसे करें?- अगर महिला पीरियड्स में है, तो वह स्वयं वट वृक्ष को स्पर्श किए बिना भी पूजा कर सकती है। दूसरी सुहागिन महिला उनके नाम से वट वृक्ष पर जल चढ़ा सकती है, कच्चा सूत बांध सकती है और परिक्रमा कर सकती है। वहीं व्रत रखने वाली महिला थोड़ी दूरी पर बैठकर मन ही मन पूजा और मंत्र जाप कर सकती है।
कथा सुनना और मानसिक जाप भी माना जाता है शुभ- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीरियड्स के दौरान व्रत कथा सुनना पूरी तरह मान्य है। महिलाएं श्रद्धा के साथ कथा सुन सकती हैं और भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी व देवी सावित्री का ध्यान कर सकती हैं। शास्त्रों में मानसिक जाप और ध्यान को भी बेहद फलदायी बताया गया है।
कब खुद कर सकती हैं पूजा?- मान्यता है कि यदि पीरियड्स का चौथा या पांचवां दिन हो और तीन दिन पूरे हो चुके हों, तो महिलाएं स्नान और बाल धोने के बाद स्वयं पूजा कर सकती हैं। हालांकि अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं।
वट सावित्री व्रत का महत्व- मान्यता के अनुसार देवी सावित्री ने अपने तप और समर्पण से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाए थे। इसी कारण यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख-समृद्धि बनाए रखने वाला माना जाता है।
सूरज कुमार , सिंगरौली, मध्य प्रदेश
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