वाराणसी। वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉक्टरों ने एक जटिल एंडोस्कोपी प्रक्रिया के जरिए मरीज की खाने की नली में 20 दिनों से फंसा नकली दांत सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी। नुकीला दांत खाने की नली की दीवारों को नुकसान पहुंचा रहा था, जिससे घाव बन गया था और खाना भी फंसने लगा था। इस दौरान मरीज का करीब 10 किलो वजन भी कम हो गया।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने एक जटिल एंडोस्कोपी प्रक्रिया के जरिए मरीज की खाने की नली में फंसा नकली दांत सुरक्षित बाहर निकालकर बड़ी राहत दी। जानकारी के अनुसार, मरीज पिछले 20 दिनों से खाने की नली में नकली दांत फंसे होने की समस्या से जूझ रहा था। नुकीला दांत नली की दीवारों को लगातार नुकसान पहुंचा रहा था, जिससे अंदर घाव बन गया था और खाना भी ऊपर की ओर अटक रहा था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि मरीज की खाने की नली फटने का खतरा पैदा हो गया था। गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग तिवारी ने बताया कि सामान्य खाद्य पदार्थों को एंडोस्कोपी से निकालना आसान होता है, लेकिन नुकीले नकली दांत को निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था। करीब 45 मिनट चली जटिल प्रक्रिया के बाद एंडोस्कोपी के जरिए दांत को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि मरीज को दो घंटे बाद ही खाना खाने की अनुमति दे दी गई। डॉक्टरों के मुताबिक, इस दौरान मरीज का करीब 10 किलो वजन भी कम हो गया था। डॉ. तिवारी ने लोगों को सलाह दी कि स्थायी नकली दांत लगवाना ज्यादा सुरक्षित है। हटाने वाले नकली दांत इस्तेमाल करने वाले लोग पानी पीते समय और भोजन करते समय विशेष सावधानी बरतें तथा समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहें।
