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अनोखा जेल म्यूजियम: जेल के अंदर कैसा होता है जीवन? हैदराबाद में खुला ‘Feel the Jail’ म्यूजियम, मिलेगा रियल एक्सपीरियंस

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By: सूरज कुमार

On: Monday, May 18, 2026 10:28 AM

Unique Jail Museum: हैदराबाद में अब आम लोग यह जान सकेंगे कि जेल के अंदर जीवन वास्तव में कैसा होता है। चंचलगुडा सेंट्रल जेल में “Feel the Jail” नाम से एक अनोखा म्यूजियम और अनुभव केंद्र शुरू किया गया है, जहां विजिटर्स को जेल जैसी वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव कराया जाएगा। इस म्यूजियम का उद्घाटन तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने किया। यह पहल स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन (SICA) के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य लोगों को जेल जीवन, कैदियों की दिनचर्या और सुधार प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना है।

हैदराबाद में अब आम लोग यह समझ सकेंगे कि जेल के अंदर जीवन वास्तव में कैसा होता है। चंचलगुडा सेंट्रल जेल में “Feel the Jail” नाम से एक अनोखा अनुभव केंद्र और जेल म्यूजियम शुरू किया गया है, जहां विजिटर्स को जेल जैसी वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव कराया जाएगा। इस म्यूजियम का उद्घाटन तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने किया। यह पहल स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन (SICA) के तहत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य लोगों को जेल व्यवस्था, कैदियों के जीवन और सुधार प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना है।

जेल कोठरी जैसा मिलेगा अनुभव- यहां आने वाले लोगों को विशेष रूप से तैयार की गई जेल कोठरियों में कुछ समय बिताने का अनुभव मिलेगा। इन कमरों में साधारण बिस्तर, स्टील के बर्तन और छोटे बाथरूम जैसी सुविधाएं रखी गई हैं, ताकि जेल जीवन की वास्तविक स्थिति को करीब से समझा जा सके।
इतिहास और सुधार की झलक भी शामिल- म्यूजियम में सिर्फ अनुभव ही नहीं, बल्कि जेल व्यवस्था का इतिहास भी दिखाया गया है। इसमें निजाम काल की जेल प्रणाली, पुराने समय की दंड व्यवस्था, और जेल सुधार से जुड़ी जानकारी शामिल है। साथ ही प्रसिद्ध व्यक्तियों से जुड़ी जेल कोठरियों और ऐतिहासिक घटनाओं को भी प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा, कैदियों द्वारा किए जा रहे कौशल प्रशिक्षण, जेल उद्योगों और उनके बनाए उत्पादों को भी यहां प्रदर्शित किया गया है, जो सुधारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
‘सजा नहीं, सुधार का केंद्र हों जेल’- कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने कहा कि जेलों का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि कैदियों को सुधारकर समाज में दोबारा शामिल करना भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक जेल व्यवस्था आत्मचिंतन, सुधार और नई शुरुआत का अवसर प्रदान करती है।
युवाओं के लिए शैक्षणिक पहल- अधिकारियों के अनुसार, यह म्यूजियम केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि एक शैक्षणिक केंद्र भी होगा। इससे युवा कानून, अनुशासन और आजादी के महत्व को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

सूरज कुमार

सूरज कुमार , सिंगरौली, मध्य प्रदेश
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