नेशनल डेस्क। सरकार नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों और कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और प्रभावित व्यक्ति खुद कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।
देशभर के सरकार नियंत्रित मंदिरों में पुजारियों और कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिलाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और प्रभावित व्यक्ति खुद न्यायालय का रुख कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय से कहा कि पुजारियों के मामलों में दखल न दें, क्योंकि संभव है कि उन्हें मंदिरों के पुजारियों और सेवादारों की वास्तविक आय की पूरी जानकारी न हो। इसके बाद अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि मंदिरों में कार्यरत पुजारियों और कर्मचारियों के वेतन व अन्य सुविधाओं की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। याचिकाकर्ता का दावा था कि कई मंदिरों में कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही और यह “व्यवस्थित शोषण” की स्थिति है। याचिका में यह भी कहा गया था कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पुजारियों ने कम वेतन को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। साथ ही यह तर्क दिया गया कि बढ़ती महंगाई के बीच सम्मानजनक जीवन के लिए पर्याप्त वेतन जरूरी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपाय अपनाए जा सकते हैं।
