बिहार। पश्चिम चंपारण जिले में शिक्षा विभाग की चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। एक शिक्षिका की मौत के करीब एक साल बाद भी विभागीय रिकॉर्ड में उनका नाम सक्रिय रहा और अनुपस्थिति को लेकर उनसे स्पष्टीकरण तक मांग लिया गया।
पश्चिम चंपारण जिले से शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां एक ऐसी शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा गया, जिनकी करीब एक साल पहले कैंसर से मौत हो चुकी है। मामला सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, शेखौना मध्य विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका अनुपमा कुमारी का जून 2025 में कैंसर के कारण निधन हो गया था। इसके बावजूद ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर उनका नाम अब भी सक्रिय बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि मौत के बाद भी विभाग की ओर से उनकी कई बार ड्यूटी लगाई गई, जिसमें प्रशिक्षण, बोर्ड परीक्षा और जनगणना से जुड़े कार्य शामिल हैं। हाल ही में ऑनलाइन उपस्थिति की जांच के दौरान विभाग ने अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों से जवाब मांगा, जिसमें मृत शिक्षिका अनुपमा कुमारी का नाम भी शामिल था। यह नोटिस परिवार तक पहुंचा तो परिजन हैरान रह गए। परिवार का कहना है कि शिक्षिका की मौत के बाद कई बार विभाग को लिखित सूचना देकर पोर्टल से नाम हटाने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मृत शिक्षिका की बेटियों ने बताया कि मां का मोबाइल नंबर अब भी पोर्टल में दर्ज है, जिस पर लगातार विभागीय संदेश आते रहते हैं, जिससे परिवार का दुख फिर ताजा हो जाता है। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की लापरवाही और डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट न होने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
