हेल्थ डेस्क। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस समय मां के शरीर को सिर्फ खुद के लिए ही नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए भी अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है। यही कारण है कि गर्भवती महिलाओं में आयरन, विटामिन D और विटामिन B12 की कमी तेजी से देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं पहले से ही पोषण की कमी के साथ प्रेग्नेंसी शुरू करती हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान शरीर में पोषक तत्वों की मांग बढ़ने से यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
प्रेग्नेंसी हर महिला के जीवन का एक खास और खूबसूरत दौर होता है। इस दौरान मां अपने होने वाले बच्चे के लिए कई तैयारियां करती है, लेकिन अक्सर खुद की सेहत को नजरअंदाज कर देती है। यही वजह है कि भारत में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं आयरन, विटामिन D और विटामिन B12 की कमी का सामना करती हैं। कई बार यह कमी इतनी धीरे-धीरे बढ़ती है कि समय रहते इसका पता ही नहीं चल पाता।
सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं लक्षण-
थकान, चक्कर आना, शरीर दर्द, कमजोरी, नींद न आना या मूड स्विंग जैसी समस्याओं को अक्सर प्रेग्नेंसी का सामान्य हिस्सा मान लिया जाता है। जबकि असल में ये शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी के संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चे दोनों को पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। जैसे-जैसे बच्चे का विकास होता है, शरीर में पोषक तत्वों की मांग भी तेजी से बढ़ने लगती है।
क्यों बढ़ जाती है पोषण की कमी?-
डॉक्टरों का कहना है कि कई महिलाएं पहले से ही कमजोर पोषण स्तर के साथ प्रेग्नेंसी शुरू करती हैं। अनियमित खानपान, तनाव, लंबे समय तक काम, पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग, सख्त डाइट और खराब लाइफस्टाइल शरीर में पोषक तत्वों की कमी पैदा कर देते हैं। भारतीय परिवारों में आज भी कई महिलाएं सबसे आखिर में खाना खाती हैं और अपने पोषण से समझौता करती हैं। वहीं कुछ महिलाएं सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण कई जरूरी चीजें खाने से बचती हैं।
गर्भावस्था में आयरन की कमी क्यों होती है?-
प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को बच्चे के विकास के लिए ज्यादा खून बनाना पड़ता है। इससे शरीर में आयरन की मांग बढ़ जाती है। लेकिन खराब खानपान और पहले से कम आयरन स्टोर होने के कारण कई महिलाएं एनीमिया की शिकार हो जाती हैं। इसके अलावा खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से भी आयरन का अवशोषण कम हो जाता है।
आयरन की कमी के लक्षण-
- अत्यधिक थकान
- सांस फूलना
- चक्कर आना
- सिरदर्द
- कमजोरी
- ध्यान लगाने में परेशानी
गंभीर मामलों में समय से पहले डिलीवरी और बच्चे का वजन कम होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
विटामिन B12 की कमी भी बड़ी समस्या- भारत में शाकाहारी लोगों के बीच विटामिन B12 की कमी तेजी से बढ़ रही है। इसकी कमी से कमजोरी, झुनझुनी, सुन्नपन, याददाश्त कमजोर होना और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भावस्था में B12 की गंभीर कमी बच्चे के तंत्रिका तंत्र के विकास को भी प्रभावित कर सकती है।
सही खानपान से मिल सकता है समाधान- डॉक्टरों का कहना है कि रोजाना संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना बेहद जरूरी है। डाइट में दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, डेयरी उत्पाद, मेवे, प्रोटीन, फोर्टिफाइड फूड और विटामिन C से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए।
आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए:-
- पालक पर नींबू डालकर खाएं
- दाल में टमाटर मिलाएं
- खाने के बाद अमरूद या संतरा खाएं
नियमित जांच है बेहद जरूरी-
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित हेल्थ चेकअप और ब्लड टेस्ट बेहद जरूरी हैं। समय रहते जांच होने से आयरन और विटामिन की कमी का पता लगाया जा सकता है और मां व बच्चे दोनों को गंभीर समस्याओं से बचाया जा सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं के पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ मां की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और हेल्थकेयर सिस्टम की भी है।
