हेल्थ डेस्क। महिलाओं में होने वाले कैंसरों में ओवेरियन कैंसर सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी शुरुआती दौर में बेहद सामान्य लक्षणों के साथ सामने आती है, जिसके कारण अधिकांश महिलाएं इसे गैस, अपच या अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही वजह है कि ओवेरियन कैंसर को “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है।
महिलाओं में होने वाले कैंसरों में ओवेरियन कैंसर सबसे गंभीर और खतरनाक बीमारियों में से एक माना जाता है। चिंता की बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि अधिकांश महिलाएं इन्हें गैस, अपच या सामान्य स्वास्थ्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही वजह है कि ओवेरियन कैंसर को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मामलों में कैंसर का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
ये हैं शुरुआती चेतावनी संकेत- ओवेरियन कैंसर के कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें लगातार नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। इनमें बार-बार पेट फूलना, पेल्विक एरिया या पेट के निचले हिस्से में दर्द, थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना, भूख कम लगना और बार-बार पेशाब आने की समस्या शामिल हैं। इसके अलावा लगातार भारीपन महसूस होना, कब्ज, पाचन संबंधी दिक्कतें, बिना वजह थकान, कमर दर्द और अचानक वजन घटना या बढ़ना भी इसके संकेत हो सकते हैं। हालांकि ये लक्षण अन्य सामान्य बीमारियों में भी दिखाई देते हैं, लेकिन यदि ये कई सप्ताह तक बने रहें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
क्यों नहीं चल पाता समय पर पता?- अक्सर महिलाएं पेट फूलने या अपच जैसी समस्याओं को खानपान से जोड़कर देखती हैं और घरेलू उपाय या गैस की दवाएं लेने लगती हैं। यही कारण है कि शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लिया जाता और बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। एक बड़ी गलतफहमी यह भी है कि नियमित पैप स्मीयर टेस्ट से ओवेरियन कैंसर का पता चल जाता है। जबकि यह जांच केवल सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए होती है और ओवेरियन कैंसर से इसका सीधा संबंध नहीं है।
नियमित स्क्रीनिंग अभी भी चुनौती- स्तन कैंसर के लिए मैमोग्राम और कोलन कैंसर के लिए कोलोनोस्कोपी जैसी स्क्रीनिंग उपलब्ध हैं, लेकिन ओवेरियन कैंसर के लिए अभी तक कोई पूरी तरह भरोसेमंद नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट मौजूद नहीं है। इसलिए डॉक्टर महिलाओं को शरीर में होने वाले बदलावों पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं।
किन महिलाओं को ज्यादा खतरा?- विशेषज्ञों के अनुसार जिन महिलाओं के परिवार में ओवेरियन, ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा हो, उनमें जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा BRCA1 और BRCA2 जीन में बदलाव, बढ़ती उम्र, मेनोपॉज के बाद का समय और कभी गर्भधारण न करना भी जोखिम कारकों में शामिल हैं।
कौन-कौन सी जांच से मिल सकती है मदद?- ओवेरियन कैंसर की पहचान के लिए डॉक्टर पेल्विक एग्जाम, ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड और CA-125 ब्लड टेस्ट जैसी जांचों की सलाह दे सकते हैं। इन जांचों की मदद से बीमारी की संभावना का पता लगाया जा सकता है और आगे की जांच की दिशा तय की जाती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव- स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ओवेरियन कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता और समय पर जांच है। यदि शरीर में कोई असामान्य बदलाव लंबे समय तक बना रहे तो उसे नजरअंदाज न करें। सही समय पर डॉक्टर से सलाह और नियमित स्वास्थ्य जांच इस गंभीर बीमारी से बचाव और सफल उपचार की संभावना को बढ़ा सकती है।