हेल्थ डेस्क। बदलती जीवनशैली, धूप में कम समय बिताना और असंतुलित खानपान के कारण महिलाओं में विटामिन D की कमी तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह कमी सिर्फ शरीर में कमजोरी ही नहीं लाती, बल्कि हड्डियों को भी कमजोर कर सकती है। समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस, जोड़ों के दर्द और बार-बार फ्रैक्चर जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
विटामिन D को “सनशाइन विटामिन” कहा जाता है क्योंकि इसका प्रमुख स्रोत सूर्य की रोशनी है। यह पोषक तत्व हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं में विटामिन D की कमी तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि शरीर में इसकी कमी हो जाए तो पर्याप्त कैल्शियम लेने के बावजूद हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। यही वजह है कि मजबूत हड्डियों और मांसपेशियों के लिए विटामिन D को बेहद जरूरी माना जाता है।
महिलाओं में क्यों बढ़ रही है कमी?- डॉक्टरों के मुताबिक बढ़ती उम्र, धूप में कम समय बिताना, घर के अंदर अधिक रहना और असंतुलित खानपान विटामिन D की कमी के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं। ऐसे में विटामिन D की कमी स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
ऑस्टियोपोरोसिस का बढ़ता जोखिम- Osteoporosis एक ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं। इस स्थिति में मामूली चोट या गिरने पर भी हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन D की कमी इस बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक है, क्योंकि इससे शरीर में कैल्शियम का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पाता।
40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को विशेष सावधानी- स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को समय-समय पर अपने विटामिन D स्तर की जांच करवानी चाहिए। यदि कमी पाई जाती है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार या सप्लीमेंट्स लिए जा सकते हैं। हालांकि, बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट्स का सेवन नहीं करना चाहिए।
विटामिन D की कमी के प्रमुख लक्षण-
- हड्डियों और जोड़ों में दर्द
- मांसपेशियों में कमजोरी
- जल्दी थकान महसूस होना
- बार-बार बीमार पड़ना
- मूड में बदलाव और उदासी
- हड्डियों का कमजोर होना
