गाजियाबाद। कहते हैं बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं, लेकिन गाजियाबाद के मोरटा गांव की दो बेटियों ने अपने त्याग और साहस से इस कहावत को नई पहचान दे दी। फादर्स डे से पहले दोनों बहनों ने अपने पिता की जान बचाने के लिए ऐसा कदम उठाया, जिसकी आज हर तरफ चर्चा हो रही है।
फादर्स डे से पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोरटा गांव की दो बेटियों ने अपने साहस, त्याग और प्रेम से पूरे देश का दिल जीत लिया। 45 वर्षीय कारोबारी और भाजपा के पूर्व सेक्टर संयोजक जयंत त्यागी की जान बचाने के लिए उनकी दोनों बेटियां खुद अंगदाता बन गईं। बड़ी बेटी रिषिका त्यागी ने अपनी एक किडनी दान की, जबकि छोटी बेटी खुशी त्यागी ने अपने लीवर का एक हिस्सा देकर पिता को नया जीवन दिया। जयंत त्यागी पिछले एक वर्ष से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। नोएडा के अस्पताल में जांच के दौरान पता चला कि उनकी किडनी और लीवर दोनों बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि जल्द प्रत्यारोपण नहीं हुआ तो उनकी जान बचाना मुश्किल होगा। पिता की जिंदगी पर संकट आया तो 22 वर्षीय रिषिका और 19 वर्षीय खुशी बिना किसी हिचकिचाहट के आगे आ गईं। परिवार ने उनके भविष्य और स्वास्थ्य की चिंता जताई, लेकिन बेटियों ने कहा कि यदि पिता ही नहीं रहेंगे तो उनके सपनों और करियर का कोई महत्व नहीं रहेगा। इस कहानी का सबसे भावुक पहलू यह भी है कि रिषिका की शादी जल्द होने वाली है। अंगदान के फैसले की जानकारी मिलने पर उनके होने वाले ससुराल पक्ष ने न केवल उनका समर्थन किया बल्कि उनके त्याग और साहस की खुलकर सराहना भी की। नोएडा के एक निजी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कई घंटों तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरा किया। डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन सफल रहा है और तीनों की सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। यह प्रेरणादायक कहानी सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। लोग इन दोनों बहनों को आधुनिक युग की मिसाल बताते हुए कह रहे हैं कि उन्होंने साबित कर दिया कि बेटियां केवल घर की शान ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर माता-पिता की सबसे बड़ी ताकत भी बन सकती हैं।
