लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी दक्षिणी वन प्रभाग में एक और बाघ की मौत हो गई है। गंभीर रूप से घायल बाघ ने सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। लगातार हो रही बाघों की मौतों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
लखीमपुर खीरी दक्षिणी वन प्रभाग में सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात एक गंभीर रूप से घायल बाघ की मौत हो गई। वन विभाग के अनुसार बाघ पहले से ही चलने-फिरने की स्थिति में नहीं था और इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम उदयपुरा गांव में मवेशी चरा रहे 55 वर्षीय काली चरण पर बाघ ने हमला कर दिया था। हालांकि ग्रामीण इस हमले में बाल-बाल बच गए और उन्हें गंभीर चोट नहीं आई। उन्हें उपचार के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। दक्षिणी खीरी वन प्रभाग के डीएफओ तापस मिहिर ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान हमले वाली जगह से करीब 100 मीटर दूर घायल अवस्था में बाघ मिला। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए कानपुर चिड़ियाघर के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. नासिर को बुलाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद देर रात बाघ ने दम तोड़ दिया। वन विभाग ने बाघ के शव को पोस्टमार्टम के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी में एक सप्ताह के भीतर बाघ की मौत का यह दूसरा मामला है, जबकि वर्ष 2026 में अब तक जिले में चार बाघों की मौत हो चुकी है। इससे पहले अप्रैल में ट्रेन की चपेट में आने से एक बाघिन की मौत हुई थी, मई में प्रजनन के दौरान संघर्ष में एक अन्य बाघिन ने दम तोड़ा था और 23 जून को ट्रैंक्विलाइज किए जाने के कुछ घंटों बाद एक चार वर्षीय बाघिन की भी मौत हो गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने दुधवा परिक्षेत्र में बाघों की सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
