हेल्थ डेस्क। आयुर्वेद में महत्वपूर्ण औषधीय पौधे के रूप में पहचानी जाने वाली गिलोय (गुडूची) को लेकर यह धारणा आम है कि इसके सेवन से डायबिटीज ठीक हो सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गिलोय डायबिटीज का इलाज नहीं है और इसे डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
गिलोय (गुडूची) को आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है और कई लोग इसे डायबिटीज का प्राकृतिक इलाज समझकर नियमित रूप से सेवन करते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि गिलोय डायबिटीज को खत्म नहीं करती और इसे दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज गिलोय की कमी से नहीं होती, बल्कि इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण विकसित होती है। वर्षों तक अधिक चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के सेवन से शरीर की ग्लूकोज नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में केवल किसी एक जड़ी-बूटी के सेवन से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि गिलोय को डॉक्टर की सलाह के साथ रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है, लेकिन यह दवाओं, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम का विकल्प नहीं है। यदि गिलोय का सेवन करना हो तो पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह कुछ दवाओं के प्रभाव को भी प्रभावित कर सकती है। गिलोय में सूजन कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, लिवर की कार्यक्षमता को सहयोग देने और तनाव कम करने जैसे गुण पाए जाते हैं। ये गुण इंसुलिन सेंसिटिविटी और मेटाबोलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रण में अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। गिलोय पाउडर, कैप्सूल, एक्सट्रैक्ट और पारंपरिक काढ़े के रूप में उपलब्ध है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसे अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चल रही दवाओं को ध्यान में रखते हुए ही सेवन करें। कुल मिलाकर, गिलोय डायबिटीज प्रबंधन में सहायक हो सकती है, लेकिन बीमारी का इलाज नहीं है।
