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सावन सोमवार को बाल न धोने की क्या है मान्यता? जानिए धार्मिक परंपरा और सच्चाई।

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By: सूरज कुमार

On: Monday, August 17, 2026 7:50 AM

नेशनल डेस्क। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। सावन के सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं। इसी दौरान कई परिवारों में सोमवार के दिन बाल न धोने की परंपरा भी प्रचलित है। कुछ लोग इसके लिए रविवार को ही बाल धो लेते हैं।

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं। इसी बीच कई परिवारों में सावन सोमवार को बाल न धोने की परंपरा भी देखने को मिलती है। मान्यता के अनुसार, सोमवार का दिन पूजा-पाठ, साधना, संयम और सादगी के लिए समर्पित माना जाता है। इसलिए कुछ परिवार इस दिन बाल धोने और अतिरिक्त साज-सज्जा से परहेज करते हैं। कई लोग सोमवार से पहले रविवार को बाल धो लेते हैं, ताकि सोमवार को पूजा और व्रत पर अधिक ध्यान दिया जा सके।

संयम और अनुशासन से जुड़ी परंपरा-
हिंदू परंपरा में व्रत को केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि आत्मसंयम और अनुशासन का प्रतीक भी माना जाता है। इसी सोच के चलते कुछ घरों में सावन सोमवार को रोजमर्रा की कुछ गतिविधियों को सीमित रखने की परंपरा है। हालांकि, बाल न धोने का अर्थ यह नहीं है कि स्नान नहीं किया जाता। श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। कुछ लोग केवल बाल धोने से परहेज करते हैं।

क्या सोमवार को बाल धोना वास्तव में मना है?-
ऐसा कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है कि सावन सोमवार को सभी लोगों के लिए बाल धोना अनिवार्य रूप से वर्जित हो। अलग-अलग परिवारों, क्षेत्रों और परंपराओं में इसके अलग-अलग नियम हैं। जहां ऐसी मान्यता है, वहां लोग उसका पालन करते हैं, जबकि अन्य लोग सामान्य रूप से स्नान कर बाल भी धोते हैं। कुछ लोक मान्यताओं में इसे माता पार्वती, वैवाहिक सुख, घर की सुख-समृद्धि और चंद्रमा से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और इन्हें धार्मिक या लोक परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सूरज कुमार

सूरज कुमार , सिंगरौली, मध्य प्रदेश
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