हेल्थ डेस्क। बारिश का मौसम भले ही गर्मी से राहत देता हो, लेकिन इस दौरान डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का खतरा बना रहता है। उमस के कारण पसीना निकलता रहता है और कई बार प्यास का एहसास कम होने से लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते। वहीं, मानसून में होने वाले दस्त, उल्टी और संक्रमण शरीर से पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को और बढ़ा सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दस्त के दौरान पानी और सोडियम-पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी डिहाइड्रेशन का प्रमुख कारण बन सकती है।
डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी को अक्सर गर्मियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन मानसून में भी इसका खतरा बना रहता है। बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ने से पसीना अधिक निकल सकता है और उमस के बावजूद कई बार प्यास कम महसूस होती है। इसके अलावा उल्टी, दस्त, बुखार, वायरल संक्रमण और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं भी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी कर सकती हैं।
सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स भी जरूरी- शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी जरूरी है, लेकिन उल्टी या दस्त जैसी स्थिति में सोडियम और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की भी कमी हो सकती है। सामान्य स्थिति में संतुलित आहार से इनकी जरूरत पूरी हो सकती है। नारियल पानी, छाछ, दही और केला जैसे खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। उल्टी-दस्त की स्थिति में स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार ORS का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज- डिहाइड्रेशन होने पर मुंह और होंठ सूखना, सामान्य से कम पेशाब आना, पेशाब का रंग गहरा होना, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन और तेज धड़कन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में बहुत कम पेशाब, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी तक हो सकती है। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
मानसून में ऐसे रखें खुद को हाइड्रेट- बारिश के मौसम में प्यास का इंतजार किए बिना नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। साफ और सुरक्षित पानी का ही सेवन करें। पानी के अलावा छाछ, सूप और अन्य पौष्टिक तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं। उल्टी या दस्त होने पर पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को गंभीरता से लें। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने पर विशेष सावधानी बरतें।
जरूरत से ज्यादा पानी भी न पिएं- हाइड्रेट रहने के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, लेकिन जरूरत से बहुत ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। अत्यधिक पानी लेने से शरीर में सोडियम का स्तर कम होने की समस्या यानी हाइपोनेट्रेमिया हो सकती है। किडनी या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों को तरल पदार्थों की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
मानसून में ठंडक के कारण पानी की जरूरत कम नहीं होती- उमस, पसीना और संक्रमण के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसलिए पर्याप्त पानी पीना, सुरक्षित पानी का सेवन करना और डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेतों को पहचानना जरूरी है। लगातार उल्टी-दस्त, बेहोशी, भ्रम या बहुत कम पेशाब जैसे गंभीर लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
