नेशनल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में समुद्र तल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यूला कंडा का श्रीकृष्ण मंदिर धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है। पहाड़ों से घिरी झील के बीच स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 14 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी ट्रैक तय करना पड़ता है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में समुद्र तल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यूला कंडा श्रीकृष्ण मंदिर आस्था और प्राकृतिक खूबसूरती का अनोखा संगम है। पहाड़ों से घिरी शांत झील के बीच बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 14 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के साथ झील की परिक्रमा भी करते हैं। यूला कंडा मंदिर की सबसे खास बात इसका झील के बीच स्थित होना है। चारों ओर ऊंचे पहाड़ और बीच में शांत झील के बीच बने मंदिर का दृश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग यहां पहुंचते हैं।
पांडवों से जुड़ी हैं मान्यताएं- यूला कंडा मंदिर को लेकर कई स्थानीय धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस क्षेत्र में समय बिताया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार युधिष्ठिर ने यहां भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया था। हालांकि, इन मान्यताओं का ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
किन्नौरी टोपी से जुड़ी अनोखी परंपरा- जन्माष्टमी के अवसर पर यहां किन्नौरी टोपी से जुड़ी एक स्थानीय मान्यता भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार टोपी को झील में उल्टा रखकर या बहाकर देखा जाता है। यदि टोपी बिना डूबे झील के दूसरे किनारे तक पहुंच जाती है तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। वहीं टोपी के डूबने को अशुभ माना जाता है। यह स्थानीय धार्मिक मान्यता है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
झील की परिक्रमा करते हैं श्रद्धालु- मंदिर में दर्शन के साथ श्रद्धालु झील की परिक्रमा भी करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार झील की परिक्रमा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति की कामना पूरी होती है।
यात्रा से पहले तैयारी जरूरी- करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई और 14 किलोमीटर के ट्रैक को देखते हुए यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। पहाड़ी क्षेत्र में मौसम अचानक बदल सकता है। यात्रियों को ट्रैकिंग के लिए उपयुक्त जूते, पर्याप्त पानी, हल्का भोजन और जरूरी सामान साथ रखना चाहिए। जन्माष्टमी के दौरान भीड़ बढ़ने के कारण ठहरने की व्यवस्था भी पहले से करना बेहतर रहता है। यूला कंडा जाने के लिए किन्नौर के युल्ला खास गांव से ट्रैक शुरू किया जाता है। दिल्ली से इसकी दूरी करीब 600 किलोमीटर, चंडीगढ़ से करीब 450 किलोमीटर और शिमला से करीब 200 किलोमीटर बताई जाती है। सड़क की स्थिति और मौसम के अनुसार यात्रा का समय बदल सकता है। ऐसे में यात्रा से पहले स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेना जरूरी है।
धार्मिक आस्था, कठिन पहाड़ी यात्रा और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम होने के कारण यूला कंडा का श्रीकृष्ण मंदिर जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
