हेल्थ डेस्क। होठों के आसपास अचानक लाल दाने या पानी से भरे छोटे फफोले निकलने के साथ जलन, खुजली या दर्द हो तो इसे सामान्य छाला समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह कोल्ड सोर (फीवर ब्लिस्टर) हो सकता है, जो आमतौर पर हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस-1 (HSV-1) के कारण होता है।
होठों के आसपास अचानक छोटे लाल दाने या पानी से भरे फफोले निकलने के साथ जलन, खुजली या दर्द हो तो इसे सामान्य छाला समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह कोल्ड सोर या फीवर ब्लिस्टर हो सकता है। यह वायरल संक्रमण आमतौर पर हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप-1 (HSV-1) के कारण होता है। कोल्ड सोर में होठों के आसपास छोटे और दर्दनाक फफोले बनते हैं, जो कुछ समय बाद फूटकर पपड़ी में बदल सकते हैं। अधिकांश मामलों में यह संक्रमण करीब दो से तीन सप्ताह में ठीक हो जाता है। हालांकि, वायरस शरीर में निष्क्रिय अवस्था में रह सकता है और बाद में दोबारा सक्रिय होकर समस्या पैदा कर सकता है।
तनाव और तेज धूप भी ट्रिगर:- विशेषज्ञों के अनुसार तनाव, थकान, नींद की कमी, बुखार, वायरल संक्रमण, तेज धूप, ठंडी हवा और हार्मोनल बदलाव कुछ लोगों में कोल्ड सोर को दोबारा सक्रिय कर सकते हैं। फफोले निकलने से पहले प्रभावित जगह पर जलन, खुजली या झुनझुनी महसूस हो सकती है। पहली बार संक्रमण होने पर बुखार, गले में खराश, सिरदर्द और मसूड़ों में दर्द जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
इलाज और बचाव:- ज्यादातर मामलों में कोल्ड सोर अपने आप ठीक हो जाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं दे सकते हैं। फफोलों को छूने या फोड़ने से बचना चाहिए। ठंडी गीली पट्टी से राहत मिल सकती है और होंठों को सूखने से बचाना चाहिए। संक्रमण फैलने से रोकने के लिए फफोले रहने तक किस करने तथा लिप बाम, तौलिया, कप और बर्तन साझा करने से बचें। प्रभावित जगह छूने के बाद हाथ अच्छी तरह धोना भी जरूरी है।
आंखों को छूने से बचें:- कोल्ड सोर के दौरान आंखों को बिना हाथ धोए छूने से संक्रमण फैलने का जोखिम हो सकता है। बार-बार कोल्ड सोर होने या लक्षण गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
