हेल्थ डेस्क। सितंबर में मानसून की विदाई के साथ मौसम में बदलाव शुरू हो जाता है। दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंड के कारण बच्चों को सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। ऐसे में बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, साफ-सफाई और नियमित शारीरिक गतिविधि बच्चों के सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।
सितंबर में मानसून विदाई की ओर बढ़ने लगता है और मौसम में उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है। कभी गर्मी तो कभी हल्की ठंड महसूस होने से बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी, गले में खराश और बुखार जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में बच्चों की डाइट पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। संतुलित और पौष्टिक आहार बच्चों के सामान्य स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा तंत्र को सहारा देने में मदद करता है। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ से इम्यूनिटी बढ़ाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। बच्चों के लिए संतुलित भोजन के साथ पर्याप्त नींद, साफ-सफाई, पर्याप्त पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बहुत ज्यादा जंक और पैकेज्ड फूड की जगह घर का पौष्टिक भोजन बेहतर विकल्प है।
दही को डाइट में करें शामिल- दही बच्चों के लिए पौष्टिक विकल्प हो सकता है। इसमें प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। दही में मौजूद प्रोबायोटिक बैक्टीरिया आंतों के स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकते हैं। बच्चों को सादा या कम चीनी वाला दही दिया जा सकता है। कैल्शियम बढ़ती उम्र में हड्डियों के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।
लहसुन का करें सीमित इस्तेमाल- लहसुन भारतीय भोजन का सामान्य हिस्सा है। इसमें एलिसिन सहित कई सल्फर कंपाउंड पाए जाते हैं। बच्चों के भोजन में इसे सब्जी, दाल या सूप के माध्यम से थोड़ी मात्रा में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, लहसुन को किसी बीमारी का इलाज या इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवा नहीं माना जाना चाहिए।
मौसमी फलों को दें प्राथमिकता- बच्चों की थाली में मौसमी फलों को जरूर शामिल करें। फल विटामिन, मिनरल और फाइबर के अच्छे स्रोत होते हैं। संतरा, मौसमी, अमरूद और कीवी जैसे फल विटामिन-सी प्रदान करते हैं, जो शरीर के सामान्य इम्यून फंक्शन के लिए जरूरी है। बच्चों को फल सीधे काटकर, सलाद या उनकी पसंद के अनुसार अन्य तरीके से दिए जा सकते हैं।
हल्दी वाला दूध भी विकल्प- हल्दी में करक्यूमिन नामक कंपाउंड पाया जाता है, जिसके गुणों पर शोध हुए हैं। यदि बच्चे को दूध से कोई परेशानी या एलर्जी नहीं है तो कभी-कभी सीमित मात्रा में हल्दी वाला दूध दिया जा सकता है। इसमें बहुत अधिक हल्दी डालने की जरूरत नहीं है। घरेलू नुस्खों को बीमारी की दवा समझकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
बादाम से मिलते हैं कई पोषक तत्व- बादाम में हेल्दी फैट, प्रोटीन, फाइबर और विटामिन-ई सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। बच्चों को बादाम देते समय उनकी उम्र और चबाने की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। छोटे बच्चों को साबुत बादाम देने से गले में अटकने का खतरा हो सकता है, इसलिए उन्हें उपयुक्त रूप में पीसकर या काटकर दिया जाना चाहिए।
सिर्फ पांच खाद्य पदार्थों पर निर्भर न रहें- बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए केवल कुछ खास खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उनकी डाइट में दाल, हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दूध या उसके विकल्प और पर्याप्त प्रोटीन शामिल होना चाहिए। पर्याप्त नींद और पानी भी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। यदि बच्चे को बार-बार बुखार, लगातार खांसी-जुकाम रहता है, वजन ठीक से नहीं बढ़ रहा या वह अक्सर बीमार पड़ता है तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
