नेशनल डेस्क। होली 2026 के मौके पर शाहजहांपुर में एक अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा ने लोगों का ध्यान खींचा। यहां हर साल की तरह इस बार भी ‘जूता मार होली’ का आयोजन किया गया, जिसमें लॉट साहब नामक व्यक्ति पर जूते और चप्पलें बरसाई जाती हैं। जुलूस फूलमती मंदिर से शुरू होकर कोतवाली तक जाता है और फिर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए घंटा घर तक पहुँचता है। जुलूस में लॉट साहब को भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है, गले में जूतों की माला पहनाई जाती है और सिर पर हेलमेट रखा जाता है ताकि चोट न लगे। भीड़ में ढोल की थाप के साथ हवा में रंग का हल्का सा धुंआ तैरता है और लोग उत्साहपूर्वक जूते फेंकते हैं।
होली का नाम आते ही लोग रंग, गुझिया और ढोल की धुन याद करते हैं, लेकिन शाहजहांपुर में यह त्योहार कुछ अनोखा और बेहद रोमांचक है। यहाँ की जूता मार होली में लॉट साहब नामक शख्स को अंग्रेज अफसर की तरह सजाकर भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है, और फिर शहर का रेला उसे देखकर जूते-चप्पल की बारिश करता है। जुलूस फूलमती मंदिर से निकलता है, कोतवाली और शहर के गलियों से होते हुए घंटा घर तक पहुँचता है। भीड़ में ढोलक की थाप, हवा में उड़ता रंग और गले में जूतों की माला पहने लॉट साहब का दृश्य दर्शकों को हैरान कर देता है। हेलमेट और सुरक्षा इंतज़ाम होने के बावजूद जूतों की झड़ी लगातार बरसती रहती है। बताया जाता है कि यह परंपरा करीब 300 साल पुरानी है और अंग्रेजी हुकूमत के जुल्म के खिलाफ जनता का प्रतीकात्मक विरोध है। यही कारण है कि लॉट साहब केवल एक तमाशा नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत प्रतीक हैं। इस बार प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कड़ा इंतज़ाम किया है। लगभग 30 इंस्पेक्टर, 150 उपनिरीक्षक, 600 हेड कांस्टेबल और दो कंपनी PAC तैनात हैं। ड्रोन निगरानी, बैरिकेडिंग और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। शाहजहांपुर की यह होली दर्शकों के लिए मनोरंजन, उत्साह और इतिहास का अद्भुत संगम है। जूते मारना सिर्फ मज़ा नहीं, बल्कि समाज और परंपरा की चेतना का प्रतीक भी है।
