स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 8 बीएमओ व 3 डॉक्टरों पर गिरी गाज
छतरपुर। जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य सेवाओं में ढिलाई और डेटा एंट्री में अनियमितताओं के चलते 8 ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) और 3 डॉक्टरों पर वेतन कटौती व वेतन वृद्धि रोकने जैसे दंडात्मक कदम उठाए गए हैं।
जिले में स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने सख्त कार्रवाई करते हुए 8 ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) और 3 डॉक्टरों पर दंडात्मक कार्रवाई की है। इनमें वेतन कटौती और वेतन वृद्धि रोकने जैसे कदम शामिल हैं। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, योजनाओं की प्रगति और पोर्टल पर डेटा एंट्री की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। समीक्षा में सामने आया कि कई ब्लॉकों में टीकाकरण, एनीमिया नियंत्रण और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों का क्रियान्वयन संतोषजनक नहीं है।
कलेक्टर ने 14-15 वर्ष की बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं में एनीमिया प्रबंधन की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से टीकाकरण अभियान में तेजी लाई जाए। नौगांव, राजनगर और बड़ामलहरा ब्लॉकों के कमजोर प्रदर्शन पर सख्त चेतावनी दी गई। कार्रवाई के दायरे में बकस्वाहा, लवकुशनगर, बड़ामलहरा और ईशानगर सहित कई ब्लॉकों के अधिकारी आए हैं। डेटा एंट्री में लापरवाही, पोर्टल अपडेट न करने और लक्ष्य के अनुरूप कार्य न करने पर संबंधित अधिकारियों के वेतन रोकने और वेतन वृद्धि स्थगित करने के आदेश जारी किए गए हैं। कुछ डॉक्टरों पर पीएम और एमएलसी रिपोर्ट में प्रगति न होने पर भी कार्रवाई की गई है।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य सूचनाएं यू-विन सहित अन्य पोर्टलों पर समय सीमा के भीतर दर्ज की जाएं और 48 घंटे के अंदर डेटा एंट्री सुनिश्चित की जाए। साथ ही एनसीडी स्क्रीनिंग में सुधार के भी निर्देश दिए गए। टीबी मुक्त अभियान की समीक्षा करते हुए 100 दिन की कार्ययोजना के तहत लक्ष्य प्राप्त करने पर जोर दिया गया। लवकुशनगर ब्लॉक में सबसे कम डेटा एंट्री मिलने पर संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया गया है। बैठक में कम उम्र में प्रसव और शिशु मृत्यु दर जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई गई। कलेक्टर ने 18 वर्ष से कम उम्र की गर्भवती महिलाओं के मामलों में सख्त निगरानी के निर्देश दिए। वहीं एसएनसीयू में मृत्यु दर में आई कमी को सकारात्मक बताते हुए टीम के प्रयासों की सराहना की।
सुजीत कुमार , सिंगरौली, मध्य प्रदेश
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