नेशनल डेस्क। ब्रेस्ट कैंसर को लंबे समय तक बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता रहा, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। हाल के वर्षों में 20 से 30 साल की महिलाओं में इसके मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलती जीवनशैली और जांच में लापरवाही इसके प्रमुख कारण हैं।
ब्रेस्ट कैंसर अब सिर्फ बढ़ती उम्र की बीमारी नहीं रह गई है। हाल के वर्षों में 20 से 30 साल की महिलाओं में इसके मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है, जिसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलती जीवनशैली इस खतरे की सबसे बड़ी वजह बन रही है। देर से शादी, मातृत्व में देरी, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान जोखिम को बढ़ा रहे हैं। Mayo Clinic की रिपोर्ट बताती है कि कम उम्र में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर अधिक आक्रामक हो सकता है। वहीं, प्रोसेस्ड फूड और पर्यावरण में मौजूद टॉक्सिन्स हार्मोनल असंतुलन पैदा कर इस बीमारी के खतरे को और बढ़ाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी हमेशा दर्द के साथ शुरू नहीं होती, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ब्रेस्ट या बगल में गांठ, त्वचा में बदलाव, निप्पल से स्राव और आकार में बदलाव जैसे संकेत दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। American Cancer Society के मुताबिक, समय पर पहचान होने पर इस बीमारी का इलाज संभव है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि महिलाएं नियमित सेल्फ एग्जामिनेशन करें, संतुलित आहार लें, व्यायाम करें और धूम्रपान व शराब से दूरी बनाकर रखें। जागरूकता और समय पर जांच ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
