नेशनल डेस्क। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए माता-पिता अक्सर महंगे खिलौनों और सुविधाओं पर जोर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि असली विकास इन चीजों से नहीं, बल्कि माता-पिता के समय, प्यार और जुड़ाव से होता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, छोटे बच्चों का दिमाग शुरुआती वर्षों में बहुत तेजी से विकसित होता है। इस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है बातचीत, स्नेह और सक्रिय सहभागिता की। जब माता-पिता बच्चों से बात करते हैं, तो भले ही बच्चा बोल न पाए, वह आवाज, भावनाएं और शब्दों को समझने लगता है, जिससे उसकी भाषा और सोचने की क्षमता मजबूत होती है।
बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास को लेकर अक्सर माता-पिता महंगे खिलौनों और सुविधाओं पर ध्यान देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि असली विकास इनसे नहीं, बल्कि माता-पिता के प्यार, समय और जुड़ाव से होता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, जीवन के शुरुआती वर्षों में बच्चों का दिमाग तेजी से विकसित होता है। इस दौरान उनसे बातचीत करना, उन्हें सुनना और उनके साथ समय बिताना बेहद जरूरी होता है। इससे उनकी भाषा क्षमता, सोचने की शक्ति और भावनात्मक विकास मजबूत होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को कहानी सुनाना, गाने या लोरी सुनाना उनकी कल्पनाशक्ति को बढ़ाता है। वहीं खेल के जरिए सीखना बच्चों के लिए सबसे प्रभावी तरीका है, जिससे वे नई चीजें आसानी से समझते और याद रखते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए महंगे खिलौनों की जरूरत नहीं होती। घर की साधारण चीजों और रोजमर्रा की गतिविधियों को ही खेल में बदलकर बच्चों को सिखाया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, खुश रहकर सीखने वाले बच्चे ज्यादा सक्रिय, समझदार और आत्मविश्वासी बनते हैं। इसलिए बच्चों के विकास में सबसे अहम भूमिका माता-पिता का प्यार और साथ निभाता है, न कि महंगे संसाधन।
