नेशनल डेस्क। बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए डांटना सामान्य बात है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार डांट के बाद माता-पिता का व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण होता है। गुस्से में बच्चों से बात बंद कर देना या दूरी बना लेना उनके मन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
बच्चों को सही-गलत सिखाने के लिए माता-पिता का डांटना सामान्य बात है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार डांट के बाद का व्यवहार बच्चे के मन पर गहरा असर डाल सकता है। अक्सर माता-पिता गुस्सा शांत होने के बाद बच्चों से बात करना बंद कर देते हैं या दूरी बना लेते हैं, जो रिश्ते के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे डांट के बाद भावनात्मक सहारे की उम्मीद करते हैं। ऐसे समय में अगर माता-पिता शांत रहकर बच्चे से सामान्य बातचीत करें या प्यार से पेश आएं, तो बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है। डांट के बाद बच्चे शर्म, डर या उलझन जैसी भावनाएं महसूस कर सकते हैं। इसलिए उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें अपनापन देना जरूरी होता है। शांत आवाज, नरम व्यवहार और प्यार भरा रवैया बच्चे के तनाव को कम करने में मदद करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अनुशासन जरूरी है, लेकिन हर बहस या डांट का अंत प्यार और भरोसे के साथ होना चाहिए, ताकि माता-पिता और बच्चों के रिश्ते में मजबूती बनी रहे।
