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बड़ी पहल: अब हिंदी में पढ़ाई जाएगा B.Tech सिविल इंजीनियरिंग, छात्रों को मिलेंगे 2 लाख रुपये

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By: सूरज कुमार

On: Wednesday, May 13, 2026 8:25 AM

Hindi Medium Engineering: मध्यप्रदेश में मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इंदौर स्थित प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग संस्थान Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (SGSITS) (एसजीएसआईटीएस) ने हिंदी माध्यम में बी.टेक सिविल इंजीनियरिंग कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। यह कोर्स शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू किया जाएगा। अभी तक इस संस्थान में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई केवल अंग्रेजी माध्यम में होती रही है, लेकिन अब छात्रों को हिंदी में तकनीकी शिक्षा का विकल्प भी मिलेगा।

मध्यप्रदेश में मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इंदौर स्थित राज्य के प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (SGSITS) ने हिंदी माध्यम में बी.टेक सिविल इंजीनियरिंग कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है।

2026-27 सत्र से होगी शुरुआत- अधिकारियों के अनुसार यह नया कोर्स शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू किया जाएगा। अभी तक संस्थान में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई केवल अंग्रेजी माध्यम में होती थी, लेकिन अब छात्रों को हिंदी में भी तकनीकी शिक्षा का विकल्प मिलेगा।
छात्रों को मिलेगा 2 लाख रुपये का प्रोत्साहन- इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जो छात्र पूरे चार वर्षों तक हिंदी माध्यम में पढ़ाई पूरी करेगा, उसे अंतिम वर्ष में राज्य सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
30 अतिरिक्त सीटों की मंजूरी- हिंदी माध्यम कोर्स के लिए 30 अतिरिक्त सीटें स्वीकृत की गई हैं। इसके बाद सिविल इंजीनियरिंग में कुल सीटों की संख्या 120 हो जाएगी, जिससे अधिक छात्रों को अवसर मिलेगा।
पुस्तकों का हिंदी अनुवाद और शिक्षक प्रशिक्षण- संस्थान की टीम पिछले चार वर्षों से AICTE मान्यता प्राप्त तकनीकी पुस्तकों का हिंदी अनुवाद कर रही है, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री मिल सके। साथ ही शिक्षकों को भी हिंदी में तकनीकी विषय पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पहले भी हुआ था प्रयास- चार वर्ष पहले संस्थान ने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में हिंदी माध्यम की शुरुआत की थी, लेकिन पूरी तरह सफल नहीं हो सका। इसके बावजूद अब एक बार फिर सिविल इंजीनियरिंग में यह बड़ा प्रयोग किया जा रहा है। यह पहल तकनीकी शिक्षा को स्थानीय भाषा में आसान बनाने और छात्रों के लिए नए अवसर खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सूरज कुमार

सूरज कुमार , सिंगरौली, मध्य प्रदेश
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