हेल्थ डेस्क। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पुणे स्थित आगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (ARI) के शोधकर्ताओं ने ऐसे नैनोपार्टिकल्स विकसित किए हैं, जो इंसानी बाल से हजारों गुना छोटे हैं और सीधे कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाकर ट्यूमर को खत्म करने में मदद कर सकते हैं।
भारतीय वैज्ञानिकों ने ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पुणे स्थित आगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (ARI) के शोधकर्ताओं ने ऐसे अत्यंत सूक्ष्म नैनोपार्टिकल्स विकसित किए हैं, जो इंसानी बाल से हजारों गुना छोटे हैं और सीधे कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये नैनोपार्टिकल्स जीन-साइलेंसिंग मॉलिक्यूल्स को सीधे ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचाते हैं। वहां पहुंचकर ये उन जीनों को निष्क्रिय कर देते हैं, जो ट्यूमर को बढ़ने, इलाज का प्रतिरोध करने और नष्ट होने से बचाने में मदद करते हैं। इससे कैंसर कोशिकाओं की जीवनरक्षक प्रणाली कमजोर पड़ जाती है और ट्यूमर का आकार काफी हद तक घट सकता है।
स्वस्थ कोशिकाओं को नहीं होगा नुकसान- इस नई तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सटीकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं में MUC1 नामक प्रोटीन अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है, जबकि सामान्य कोशिकाओं में इसकी मौजूदगी बेहद कम होती है। नैनोपार्टिकल्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे MUC1 को पहचानकर केवल कैंसर कोशिकाओं से जुड़ें और स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना अपना काम करें। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में अधिक सुरक्षित साबित हो सकती है, क्योंकि कीमोथेरेपी अक्सर कैंसर के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी प्रभावित करती है।
अभी शुरुआती चरण में शोध- हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है और इसके प्रयोग फिलहाल चूहों पर किए गए हैं। इंसानों पर उपयोग से पहले इसे कई चरणों की परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बावजूद शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य की ‘प्रिसिजन कैंसर मेडिसिन’ के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है।
दूसरी ओर कीमोथेरेपी दवाओं की कमी बनी चिंता-
इसी बीच देशभर में कैंसर मरीजों के लिए एक नई चुनौती भी सामने आई है। जीवनरक्षक कीमोथेरेपी दवाएं सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की आपूर्ति में कमी के कारण कई अस्पतालों में इलाज प्रभावित हो रहा है। दिल्ली के All India Institute of Medical Sciences समेत कई सरकारी और निजी कैंसर केंद्रों के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि दवाओं की कमी लंबे समय तक बनी रही तो मरीजों के उपचार परिणामों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अस्पतालों में दवाओं का स्टॉक तेजी से घट रहा है, जबकि मरीज और उनके परिजन इन्हें उपलब्ध कराने वाली फार्मेसियों और वितरकों की तलाश में जुटे हैं।
