उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड भगवान शिव की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिरों में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। जागेश्वर, बागेश्वर और मुक्तेश्वर जैसे पवित्र धाम अपनी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक रहस्यों के कारण विशेष महत्व रखते हैं।
देवभूमि उत्तराखंड भगवान शिव की असीम कृपा और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां मौजूद प्राचीन शिव मंदिरों में सालभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। जागेश्वर, बागेश्वर और मुक्तेश्वर जैसे पावन धाम न सिर्फ धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि इनके साथ जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भी भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
जागेश्वर धाम को कहा जाता है उत्तराखंड का पांचवां धाम-
अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम को भगवान शिव का बेहद पवित्र स्थल माना जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर पहली बार शिवलिंग पूजा की शुरुआत हुई थी। जागेश्वर को योगेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव जागृत हुए थे, इसलिए इस स्थान का नाम जागेश्वर पड़ा। मंदिर की वास्तुकला केदारनाथ धाम से मिलती-जुलती दिखाई देती है।
बागनाथ मंदिर में बाघ रूप में पूजे जाते हैं भोलेनाथ-
बागेश्वर जिले में स्थित बागनाथ मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव यहां व्याघ्र यानी बाघ के रूप में प्रकट हुए थे। कहा जाता है कि ऋषि मार्कण्डेय की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें बाघ रूप में दर्शन दिए थे। सरयू और गोमती नदी के संगम पर स्थित इस मंदिर में दक्षिणमुखी शिवलिंग की पूजा की जाती है। यहां हर साल मकर संक्रांति पर प्रसिद्ध उत्तरायणी मेले का आयोजन होता है।
मुक्तेश्वर मंदिर से जुड़ी है पांडवों की आस्था-
नैनीताल जिले में स्थित मुक्तेश्वर मंदिर भगवान शिव का बेहद प्राचीन धाम माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने यहां एक राक्षस का वध कर उसे मुक्ति प्रदान की थी, जिसके कारण इस स्थान का नाम मुक्तेश्वर पड़ा। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यहां से हिमालय की बर्फीली चोटियों का अद्भुत दृश्य भी दिखाई देता है।
