गोरखपुर। जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत अब लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बनती जा रही है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि उपभोक्ता सिलेंडर पाने के लिए रातभर लाइन में डटे रहने को मजबूर हैं। किसी ने सड़क किनारे चादर बिछाई तो कोई मच्छरदानी लगाकर अपनी बारी का इंतजार करता नजर आया। इन्हीं में एक उपभोक्ता राजाराम की कहानी चर्चा का विषय बन गई। राजाराम ने बताया कि उनकी पत्नी ने साफ शब्दों में कह दिया — “गैस सिलेंडर लेकर आओगे तभी खाना मिलेगा।” पत्नी की इस चेतावनी के बाद वह रात 11 बजे से ही गैस एजेंसी के बाहर लंबी कतार में जाकर बैठ गए।
जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ने लगी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि उपभोक्ताओं को सिलेंडर पाने के लिए रातभर लाइन में डेरा डालना पड़ रहा है। कहीं लोग चादर बिछाकर बैठे हैं तो कहीं मच्छरदानी लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। इसी बीच एक उपभोक्ता राजाराम का बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने साफ कह दिया है कि “गैस सिलेंडर लेकर आओगे तभी खाना मिलेगा।” यही वजह है कि वह रात 11 बजे से ही 200 सिलेंडरों की लंबी कतार में लग गए। राजाराम ने बताया कि हर महीने तीन-चार दिन लाइन में लगने के बाद भी कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। सिलेंडर चोरी न हो और नींद न आ जाए, इसके लिए लोग हल्का खाना खाकर लाइन में पहुंच रहे हैं। कई उपभोक्ता रातभर जागकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से आई महिलाओं ने भी परेशानी बयां की। महावीर छपरा की बेलमती देवी ने बताया कि वह पिछले छह दिनों से लाइन में लग रही हैं, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिला। मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिससे धुएं के कारण आंखों में जलन और दर्द हो रहा है। वहीं कई महिलाओं ने कहा कि लकड़ी पर खाना बनाने में ज्यादा समय लगता है, जिससे बच्चों को सुबह स्कूल भेजने में दिक्कत होती है। लोगों का आरोप है कि अमीरों को आसानी से गैस मिल जाती है, जबकि गरीब उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। हालांकि जिला प्रशासन और गैस एजेंसियां जिले में गैस की कमी से इनकार कर रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की लंबी कतारें और लगातार मिल रही शिकायतें जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही हैं। वहीं काला बाजारी के आरोपों ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
