लाइफस्टाइल। गर्मी के मौसम में नींबू की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में घर के गमले में नींबू का पौधा लगाकर ताजा नींबू हासिल किया जा सकता है। गार्डनिंग एक्सपर्ट के मुताबिक, सही मिट्टी, पर्याप्त जगह और नियमित पोषण के साथ पौधे की अच्छी ग्रोथ हो सकती है। नींबू के पौधे के लिए 14 से 18 इंच का गमला या ग्रो बैग बेहतर माना जाता है। मिट्टी में करीब 90 प्रतिशत गार्डन मिट्टी और 10 प्रतिशत कंपोस्ट खाद मिलाई जा सकती है। पौधा लगाने के बाद समय-समय पर गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट देने से पोषण मिलता है।
गर्मी के मौसम में नींबू की मांग बढ़ जाती है। नींबू पानी से लेकर सलाद और भोजन तक में इसका इस्तेमाल होने के कारण इसकी जरूरत लगातार बनी रहती है। बाजार में नींबू की कीमत बढ़ने पर घर की बालकनी, छत या छोटे से बगीचे में गमले में नींबू का पौधा लगाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, केवल पौधा लगाने से ही भरपूर फल नहीं मिलते। इसके लिए सही किस्म, उपयुक्त गमला, मिट्टी, धूप और नियमित पोषण का ध्यान रखना जरूरी है।
बड़े गमले में लगाएं पौधा- गार्डनिंग विशेषज्ञों के अनुसार, नींबू का पौधा लगाने के लिए 14, 16 या 18 इंच का गमला उपयुक्त रहता है। छोटे गमले में पौधे की जड़ों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती और पौधा बढ़ने के साथ गमला बदलना पड़ सकता है। ग्रो बैग या मिट्टी का गमला भी इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि इनमें जल निकासी और हवा का आवागमन बेहतर तरीके से हो सकता है।
देसी नींबू की किस्म का कर सकते हैं चुनाव- विशेषज्ञों के मुताबिक, घर में पौधा लगाने के लिए देसी नींबू की किस्म को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसकी पहचान आमतौर पर पतली और चिकनी पत्तियों से की जाती है। हालांकि, पौधा खरीदते समय स्थानीय नर्सरी से उसकी किस्म और फल देने की क्षमता की जानकारी लेना बेहतर रहता है।
मिट्टी तैयार करना जरूरी- नींबू के पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए मिट्टी का मिश्रण महत्वपूर्ण है। गार्डन मिट्टी में कंपोस्ट, गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। पौधा लगाने से पहले गमले में जल निकासी के पर्याप्त छेद जरूर होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके और जड़ों में पानी जमा न हो। पौधे को गमले में लगाने के बाद पर्याप्त पानी दें। इसके बाद मिट्टी की ऊपरी परत सूखने पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करें। लगातार पानी जमा रहने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
हर महीने दें जैविक खाद- पौधे को लगातार पोषण देने के लिए समय-समय पर गोबर की सड़ी खाद या वर्मीकंपोस्ट दिया जा सकता है। गुड़ाई करने के बाद खाद को मिट्टी की ऊपरी सतह पर समान रूप से मिलाने से पौधे को पोषक तत्व मिलते हैं। इसके साथ पौधे को पर्याप्त धूप मिलना भी जरूरी है।
एप्सम सॉल्ट का इस्तेमाल- पौधों की देखभाल में कुछ लोग एप्सम सॉल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट) का इस्तेमाल करते हैं। इसमें मैग्नीशियम और सल्फर होते हैं, जो पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। मैग्नीशियम क्लोरोफिल निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नींबू के पौधे में इसका इस्तेमाल करने से पहले मिट्टी की स्थिति और पौधे की वास्तविक पोषण जरूरत को ध्यान में रखना चाहिए। घरेलू गार्डनिंग में आम तौर पर आधा चम्मच एप्सम सॉल्ट एक लीटर पानी में घोलकर सीमित अंतराल पर देने की सलाह दी जाती है। लेकिन इसे नियमित खाद का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। जरूरत से ज्यादा एप्सम सॉल्ट देने से मिट्टी में लवण की मात्रा बढ़ सकती है और पौधे को नुकसान भी हो सकता है। खासकर यदि सिंचाई के पानी में पहले से लवणता अधिक है तो इसका इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।
सिर्फ खाद से नहीं आएंगे ज्यादा फल- नींबू के पौधे में फल आने के लिए केवल किसी एक खाद या पाउडर पर निर्भर रहना सही नहीं है। पौधे की किस्म, उम्र, पर्याप्त धूप, पानी की व्यवस्था, मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों का संतुलन सभी महत्वपूर्ण हैं। पौधे में फूल आने के बाद परागण और मौसम की स्थिति भी फल बनने को प्रभावित कर सकती है। इसलिए गमले में नींबू का पौधा लगाते समय अच्छी गुणवत्ता का पौधा, पर्याप्त आकार का गमला, अच्छी जल निकासी, पौष्टिक मिट्टी और नियमित देखभाल पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। उचित देखभाल के साथ घर में उगाया गया नींबू का पौधा लंबे समय तक फल देने वाला उपयोगी पौधा बन सकता है।