हेल्थ डेस्क। फिल्मों में हार्ट अटैक को अक्सर छाती में तेज दर्द और अचानक गिरने के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविक जीवन में इसके लक्षण इतने स्पष्ट नहीं होते। डॉक्टरों के मुताबिक हार्ट अटैक से पहले शरीर कई बार छोटे-छोटे संकेत देता है, जिन्हें लोग गैस, एसिडिटी, थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इलाज में यही देरी गंभीर साबित हो सकती है।
हार्ट अटैक को अक्सर फिल्मों में छाती पकड़कर अचानक गिरने के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक हार्ट अटैक से पहले शरीर कई तरह के संकेत दे सकता है, जिन्हें लोग अक्सर एसिडिटी, थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही इमरजेंसी इलाज में देरी का कारण बन सकती है। हार्ट अटैक के दौरान हृदय की मांसपेशियों के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति कम या पूरी तरह बंद हो जाती है। यह स्थिति जितनी देर बनी रहती है, हृदय के ऊतकों को उतना ही अधिक और स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए लक्षणों को पहचानकर समय पर चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है।
सीने में तेज दर्द होना जरूरी नहीं- हार्ट अटैक का सबसे सामान्य संकेत सीने में बेचैनी है। यह हमेशा तेज या चुभने वाले दर्द के रूप में महसूस नहीं होती। सीने के बीच या पूरे सीने में दबाव, कसाव, जकड़न, भारीपन या भरा-भरा महसूस होना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है। यह परेशानी कुछ मिनट तक रह सकती है, कम हो सकती है और फिर दोबारा बढ़ सकती है। ऐसे में दर्द के असहनीय होने का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।
एसिडिटी समझकर न करें नजरअंदाज- अपच, एसिडिटी और सीने में जलन आम समस्याएं हैं, लेकिन कभी-कभी हार्ट अटैक के लक्षण भी इन्हीं जैसे दिखाई दे सकते हैं। यदि बिना किसी स्पष्ट कारण सीने में नई तरह की जलन, भारीपन या बेचैनी हो और साथ में पसीना, सांस लेने में परेशानी, जी मिचलाना, चक्कर या शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द फैलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
महिलाओं और बुजुर्गों में अलग हो सकते हैं लक्षण- महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक के लक्षण कई बार सामान्य से अलग हो सकते हैं। महिलाओं में सीने के दर्द के बजाय जी मिचलाना, उल्टी, अत्यधिक थकान या पीठ में दबाव जैसी शिकायतें सामने आ सकती हैं। इसलिए किसी भी नए या असामान्य लक्षण को केवल थकान, गैस या तनाव मानकर टालना उचित नहीं है। समय पर चिकित्सकीय मदद लेना जान बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
