हेल्थ डेस्क। जीभ सिर्फ स्वाद पहचानने और बोलने में मदद नहीं करती, बल्कि शरीर में होने वाले कुछ बदलावों के संकेत भी दे सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार जीभ का रंग, नमी, बनावट और उस पर जमी परत में बदलाव डिहाइड्रेशन, संक्रमण, पोषक तत्वों की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
आमतौर पर स्वस्थ जीभ गुलाबी रंग की होती है और उसकी सतह पर छोटे-छोटे उभार मौजूद रहते हैं, जिन्हें पैपिला कहा जाता है। हालांकि जीभ के रंग में हर बदलाव किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। खान-पान, मुंह की सफाई, धूम्रपान, मुंह का सूखापन और सामान्य संक्रमण भी इसके कारण हो सकते हैं।
सफेद जीभ- जीभ पर सफेद परत जमना काफी आम है। डिहाइड्रेशन, मुंह का सूखापन, खराब ओरल हाइजीन, धूम्रपान, बुखार और ओरल थ्रश इसके संभावित कारण हो सकते हैं। ओरल थ्रश कैंडिडा यीस्ट से होने वाला फंगल संक्रमण है।
पीली जीभ- पीली जीभ के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मुंह में बैक्टीरिया की अधिकता, खराब सफाई, धूम्रपान या कुछ खाद्य पदार्थ इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। लगातार जीभ फीकी या पीली दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह से एनीमिया या पोषक तत्वों की कमी की जांच कराई जा सकती है।
चमकीली लाल जीभ- बहुत ज्यादा लाल या स्ट्रॉबेरी जैसी जीभ विटामिन B12 या फोलेट की कमी, सूजन या कुछ संक्रमणों से जुड़ी हो सकती है। स्कार्लेट फीवर जैसे संक्रमण में भी जीभ लाल और उभरी हुई दिखाई दे सकती है।
नीली या बैंगनी जीभ- जीभ का नीला या बैंगनी पड़ना शरीर में ऑक्सीजन की कमी या रक्त संचार से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। सांस या हृदय से संबंधित गंभीर समस्याओं में भी ऐसा दिखाई दे सकता है। जीभ अचानक नीली पड़ने लगे या यह बदलाव लगातार बना रहे तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
लंबे समय तक बदलाव को न करें नजरअंदाज- विशेषज्ञों के अनुसार जीभ में होने वाले अधिकांश बदलाव अस्थायी होते हैं, लेकिन लंबे समय तक रहने वाले घाव, मोटे सफेद या लाल पैच, लगातार दर्द, सूजन अथवा निगलने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच कराना बेहतर है।