नेशनल डेस्क। देश की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सड़क परियोजनाओं में शामिल ज़ोजिला टनल ने मंगलवार को एक बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया। टनल में 13 किलोमीटर से अधिक खुदाई कार्य पूरा होने के साथ “फाइनल ब्रेकथ्रू” सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में सड़क संपर्क स्थापित करने का सपना अब हकीकत के और करीब पहुंच गया है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए बेहद महत्वपूर्ण ज़ोजिला टनल परियोजना ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली। करीब 13.15 किलोमीटर लंबी टनल की खुदाई का अंतिम चरण पूरा होने के साथ ही दोनों सिरों का सफलतापूर्वक मिलन हो गया, जिसे परियोजना के “फाइनल ब्रेकथ्रू” के रूप में देखा जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने समारोह में हिस्सा लिया और अंतिम ब्लास्ट प्रक्रिया का साक्षी बने। लगभग 6,800 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पूरी होने के बाद कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच हर मौसम में निर्बाध सड़क संपर्क सुनिश्चित करेगी। समुद्र तल से लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर बन रही यह टनल दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब द्विदिशीय (बाई-डायरेक्शनल) सड़क सुरंगों में शामिल होगी। वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में ज़ोजिला दर्रा कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख का सड़क संपर्क प्रभावित होता है। टनल के संचालन में आने के बाद यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से न केवल पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सेना की रणनीतिक आवाजाही और लॉजिस्टिक्स भी पहले से अधिक मजबूत होंगे। इसके अलावा श्रीनगर से लद्दाख की यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह उपलब्धि भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण हिमालयी इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है और इसे लद्दाख के लिए “ऑल-वेदर लाइफलाइन” की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
