बांदा। जिले के जसपुरा कस्बे में एक शादी समारोह उस समय विवाद में बदल गया, जब जयमाला के बाद फेरों से पहले दूल्हे के गोत्र को लेकर दोनों पक्षों में तीखी कहासुनी हो गई। मामला इतना बढ़ा कि शादी टूट गई और बरात बिना दुल्हन के लौट गई।
जिले में एक शादी समारोह उस समय विवाद में बदल गया, जब सात फेरों से पहले दूल्हे के ‘गोत्र’ को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। जयमाला की रस्म पूरी होने के बाद शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि मामला थाने तक पहुंच गया और आखिरकार बरात बिना दुल्हन के लौट गई। जानकारी के मुताबिक, इटावा जिले के बकेवर थाना क्षेत्र की युवती का विवाह बांदा जिले के अमारा गांव निवासी युवक से तय हुआ था। दोनों परिवार लंबे समय से सूरत में रह रहे थे और वहीं यह रिश्ता तय हुआ था। मंगलवार को जसपुरा कस्बे के एक मैरिज हॉल में शादी समारोह आयोजित किया गया था। बरात का स्वागत, द्वारचार और जयमाला की रस्में हंसी-खुशी पूरी हुईं। बताया जा रहा है कि फेरों से पहले पंडित ने दूल्हे से गोत्र पूछा। इसी दौरान गोत्र और जाति को लेकर विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि दूल्हा पक्ष स्पष्ट जवाब नहीं दे सका, जिसके बाद दोनों परिवारों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और शादी की रस्में रोक दी गईं। हंगामे के बीच लड़की की मां मधु तिवारी की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गईं। परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहीं सूचना मिलने पर जसपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले जाकर समझाइश दी।
लड़की पक्ष का आरोप है कि दूल्हे ने खुद को ‘पाठक’ ब्राह्मण बताकर रिश्ता तय किया था, जबकि बाद में उसके निषाद समाज से होने की बात सामने आई। दूसरी ओर दूल्हा पक्ष का कहना है कि उन्होंने शुरुआत से ही अपनी जाति के बारे में सही जानकारी दी थी और कुछ भी नहीं छिपाया गया। करीब पांच घंटे चली पंचायत और बातचीत के बाद दोनों पक्षों में समझौता तो हो गया, लेकिन रिश्ता टूट गया। अंत में दूल्हा बिना दुल्हन के ही बरात लेकर वापस लौट गया।
