हेल्थ डेस्क। भारतीय मसालों में काली मिर्च का इस्तेमाल आम है, लेकिन इसकी करीबी रिश्तेदार पिप्पली यानी लंबी मिर्च भी पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से इस्तेमाल होती आ रही है। उंगली जैसी दिखाई देने वाली पिप्पली स्वाद में तीखी होती है और इसका उपयोग कई घरेलू एवं आयुर्वेदिक नुस्खों में किया जाता है।
मसालों में काली मिर्च का इस्तेमाल तो आम है, लेकिन इसकी करीबी रिश्तेदार लंबी मिर्च यानी पिप्पली (Piper longum) भी पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से उपयोग की जाती रही है। उंगली जैसी आकृति वाली यह मिर्च स्वाद में तीखी होती है और आयुर्वेद में इसे कई तरह से उपयोग किया जाता है। पिप्पली को पाचन के लिए उपयोगी माना जाता है। यह गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी परेशानियों में राहत देने में मदद कर सकती है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण पारंपरिक रूप से सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। पिप्पली का उपयोग सांस से जुड़ी परेशानियों में भी पारंपरिक रूप से किया जाता है। इसे बलगम साफ करने और गले की खराश में राहत के लिए शहद या गर्म पानी के साथ लिया जाता है। इसके अलावा इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में भी इसके इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है। कुछ शोधों में पिप्पली के संभावित एंटी-डायबिटिक और हृदय संबंधी प्रभावों का भी अध्ययन किया गया है, लेकिन इन दावों को इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। खासकर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या अन्य बीमारी की दवा लेने वाले लोगों को पिप्पली का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
