नेशनल डेस्क। मध्य प्रदेश की महिला अधिकारी अमिता सिंह तोमर का करियर एक समय बेहद चर्चित और प्रेरणादायक माना जाता था, लेकिन बाद में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनके पूरे सफर को विवादों में बदल दिया। अमिता सिंह तोमर ने 2003 में सरकारी सेवा में नायब तहसीलदार के रूप में शुरुआत की थी। मेहनत और कार्यक्षमता के आधार पर 2011 में उन्हें तहसीलदार के पद पर पदोन्नति मिली। इसी वर्ष वे उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं जब उन्होंने टीवी शो “कौन बनेगा करोड़पति” में 50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि जीती।
महिला अधिकारी अमिता सिंह तोमर का करियर कभी उपलब्धियों और सुर्खियों से भरा रहा, लेकिन अब वे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में हैं। अमिता सिंह तोमर ने 2003 में नायब तहसीलदार के रूप में सरकारी सेवा की शुरुआत की थी। मेहनत के बल पर 2011 में वे तहसीलदार बनीं। इसी साल उन्होंने टीवी शो “कौन बनेगा करोड़पति” में 50 लाख रुपये जीतकर राष्ट्रीय पहचान हासिल की। अपने कार्यकाल में लगातार तबादलों के कारण उन्हें “ट्रांसफर वाली मैडम” के नाम से भी जाना जाता था। बताया जाता है कि 23 साल की सेवा में उनका 25 से अधिक बार ट्रांसफर हुआ और वे लगभग 10 जिलों में पदस्थ रहीं। हालांकि, वर्ष 2021 में श्योपुर जिले में बाढ़ राहत राशि वितरण में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। जांच में 127 फर्जी लाभार्थियों के खातों में राशि ट्रांसफर होने की बात सामने आई। इस मामले में अमिता सिंह तोमर सहित अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हुई। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और जांच जारी है। एक समय सफलता और पहचान की मिसाल रहीं अमिता सिंह तोमर का करियर अब गंभीर आरोपों और कानूनी कार्रवाई के कारण विवादों में है।
