सिंगरौली। कलेक्ट्रेट परिसर में काम करने वाले सफाई मजदूरों की शिकायत के बाद भी कथित तौर पर समस्या का समाधान नहीं होने से प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित वेदन्ति विश्वकर्मा, मनीषा केवट, सहोदरिया यादव और रामनारायण शाह का आरोप है कि करीब पांच साल से काम करने के बावजूद उन्हें महज 5 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है।
कलेक्ट्रेट परिसर में साफ-सफाई कर अपनी मेहनत से व्यवस्था को संवारने वाले मजदूरों की शिकायत ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित वेदन्ति विश्वकर्मा, मनीषा केवट, सहोदरिया यादव और रामनारायण शाह का आरोप है कि वे करीब पांच वर्षों से काम कर रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें महज 5 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है।
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने अपनी परेशानी कलेक्टर के सामने रखी थी। उन्हें स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि नियमानुसार जितनी मजदूरी बनती है, उसका पूरा भुगतान कराया जाएगा। लेकिन पीड़ितों का दावा है कि आश्वासन के बाद भी उनकी मजदूरी नहीं बढ़ी और व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। मजदूरों ने ठेकेदार पर बैंक खाते में वेतन नहीं देने, नकद भुगतान करने और भुगतान से पहले सफेद कागज पर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया है। सवाल यह है कि कलेक्टर तक शिकायत पहुंचने के बाद भी यदि मजदूरों को उनका कथित हक नहीं मिल पा रहा है, तो ठेका व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है? पीड़ितों ने मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और नियमानुसार मजदूरी दिलाने की मांग की है।
