सिंगरौली। मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के साथ नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने खदानों में कोयला उत्पादन और प्रेषण तेज कर दिया है। 8 सितंबर को एनसीएल का कोयला उत्पादन 1 से 3 सितंबर के औसत की तुलना में 67 प्रतिशत बढ़ा, जबकि प्रेषण में 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मानसून की रफ्तार धीमी पड़ते ही नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने खदानों में कोयला उत्पादन और प्रेषण तेज कर दिया है। 8 सितंबर को एनसीएल का दैनिक कोयला उत्पादन 1 से 3 सितंबर के औसत की तुलना में 67 प्रतिशत बढ़ा। वहीं कोयला प्रेषण में 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026-27 में 8 सितंबर तक एनसीएल ने 51.43 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है, जबकि कुल प्रेषण 55 मिलियन टन तक पहुंच गया। एनसीएल के कुल कोयला प्रेषण का करीब 87 प्रतिशत हिस्सा विद्युत क्षेत्र को जाता है। रेलवे के जरिए रेक लोडिंग में भी तेजी आई है। 8 सितंबर को एनसीएल ने 41 रेक लोड किए, जबकि 1 से 3 सितंबर के दौरान प्रतिदिन औसतन 19 रेक लोड किए जा रहे थे। एनसीएल उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित पिटहेड बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति करती है। भारी बारिश के बाद परिचालन को गति देने के लिए आंतरिक सड़कों में सुधार और लगातार डी-वाटरिंग जैसे कदम उठाए गए। इससे खनन क्षेत्रों से कोल हैंडलिंग प्लांट और रेलवे साइडिंग तक कोयले की आवाजाही तेज हुई है। परियोजना टीमों, रेलवे अधिकारियों और उपभोक्ताओं के बीच समन्वय से आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिली है। कोल इंडिया स्तर पर भी 8 सितंबर को औसत दैनिक उत्पादन करीब 40 प्रतिशत बढ़कर 1.91 मिलियन टन पहुंच गया। वहीं विद्युत क्षेत्र को औसत दैनिक कोयला प्रेषण 27 प्रतिशत बढ़कर 1.74 मिलियन टन हो गया। मानसून के कमजोर पड़ने के साथ उत्पादन और आपूर्ति में यह सुधार बिजली संयंत्रों को कोयला आपूर्ति के सामान्य स्तर की ओर लौटने का संकेत माना जा रहा है।
