नेशनल डेस्क। सिख साम्राज्य की अंतिम महारानी Maharani Jind Kaur से जुड़ी एक ऐतिहासिक विरासत वर्षों बाद फिर सिख समुदाय के पास लौट आई। महाराजा Ranjit Singh की सबसे छोटी पत्नी और महाराजा Duleep Singh की माता महारानी जिंदा कौर का बेशकीमती हार, जिसे अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जे के दौरान जब्त कर लिया था, अब एक सिख उद्योगपति ने नीलामी में खरीदकर वापस हासिल किया है।
सिख साम्राज्य की अंतिम महारानी Maharani Jind Kaur से जुड़ी एक ऐतिहासिक विरासत आखिरकार वर्षों बाद फिर सिख समुदाय के पास लौट आई। अंग्रेजों द्वारा लाहौर दरबार से जब्त किया गया महारानी जिंदा कौर का बेशकीमती हार अब एक सिख उद्योगपति ने नीलामी में खरीदकर वापस हासिल कर लिया है। महारानी जिंदा कौर, जिन्हें “रानी जिंदा” और “पंजाब की शेरनी” के नाम से भी जाना जाता है, सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा Ranjit Singh की सबसे छोटी पत्नी थीं। उन्होंने अपने पुत्र महाराजा Duleep Singh के अधिकार और सिख साम्राज्य की विरासत को बचाने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। इतिहासकारों के अनुसार, पंजाब पर कब्जे के बाद अंग्रेजों ने लाहौर दरबार की कई कीमती वस्तुएं जब्त कर ली थीं। इन्हीं में महारानी जिंदा कौर का अनमोल हार भी शामिल था। बाद में यह हार लंदन में नीलामी के लिए रखा गया। यूके के प्रसिद्ध सिख उद्योगपति Peter Singh Virdee ने इस ऐतिहासिक हार को करीब 88 हजार डॉलर की बोली लगाकर खरीदा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक हार नहीं, बल्कि सिख इतिहास और सम्मान की अमूल्य धरोहर है। पीटर सिंह विरदी ने कहा, “अगर यह विरासत किसी और के हाथों चली जाती तो हमें जीवनभर पछतावा रहता। यह हमारी महारानी की निशानी है और इसे अपने समुदाय से दूर नहीं जाने दे सकते थे।” सिख समुदाय में इस पहल को गर्व और सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। महारानी जिंदा कौर को आज भी साहस, संघर्ष और आत्मसम्मान की प्रतीक माना जाता है।
