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महिलाओं की सेहत के लिए खतरे की घंटी! पेट से जुड़ी इन 4 समस्याओं को न करें नजरअंदाज

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By: सूरज कुमार

On: Thursday, June 25, 2026 10:59 AM

हेल्थ डेस्क। महिलाओं में पेट से जुड़ी समस्याओं को अक्सर सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यही लापरवाही कई बार गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार महिलाओं को अपनी गट हेल्थ (आंतों की सेहत) पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि कुछ लक्षण बड़े खतरे की चेतावनी हो सकते हैं।

पेट की सेहत यानी गट हेल्थ हमारे पूरे शरीर की कार्यप्रणाली से जुड़ी होती है। पेट खराब होने पर न सिर्फ भूख प्रभावित होती है, बल्कि शरीर में कमजोरी और थकान भी महसूस होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में पेट से जुड़ी कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि ये गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती हैं।

बिना कारण आयरन की कमी हो सकती है खतरे का संकेत- महिलाओं में आयरन की कमी आम बात मानी जाती है, जिसका कारण अक्सर अधिक मासिक धर्म रक्तस्राव होता है। लेकिन यदि किसी महिला में बिना किसी स्पष्ट कारण के आयरन की कमी हो रही है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यह साइलेंट गट इंफ्लेमेशन, सीलिएक रोग या शुरुआती आंत्र (कोलन) कैंसर का संकेत हो सकता है।
आंत्र कैंसर के लक्षण अक्सर छिपे रहते हैं- आंत्र कैंसर हमेशा स्पष्ट लक्षणों के साथ सामने नहीं आता। थकान, पेट में ऐंठन, कब्ज या शौच की आदतों में बदलाव जैसे संकेतों को महिलाएं अक्सर तनाव, पीरियड्स या आईबीएस समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। इसी कारण बीमारी का पता देर से चलता है और कैंसर बढ़ता रहता है।
मेनोपॉज का असर सिर्फ हार्मोन पर नहीं, आंतों पर भी- पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव आंतों की सेहत को भी प्रभावित करते हैं। एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है, कब्ज बढ़ सकती है और आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे समय में खानपान और गट हेल्थ पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
इलाज में देरी पड़ सकती है भारी- विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाएं पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए डॉक्टर से सलाह लेने में अक्सर काफी देर कर देती हैं। दर्द, सूजन और पाचन संबंधी गड़बड़ियों को सामान्य हार्मोनल बदलाव मान लेना खतरनाक साबित हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार महिलाओं में आईबीएस (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) की पहचान होने में औसतन 6.6 वर्ष लग जाते हैं।
क्या करें?- विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि लगातार थकान, पेट दर्द, कब्ज, सूजन, वजन कम होना या आयरन की कमी जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और उपचार कई गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकता है।

सूरज कुमार

सूरज कुमार , सिंगरौली, मध्य प्रदेश
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