मनोरंजन डेस्क। लीसा रे ने अपने कम उम्र में मेनोपॉज के अनुभव और अपने शरीर पर कीमोथेरेपी के प्रभाव के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि 37 साल की उम्र में ही कीमोथेरेपी के कारण उनका शरीर मेनोपॉज की स्थिति में पहुंच गया, जिससे उन्हें इस बदलाव का एहसास भी नहीं हुआ। उनके अनुसार, कई महिलाओं की तरह उन्होंने भी इन बदलावों को समझने के बजाय इनसे तालमेल बिठाने की कोशिश की और सालों तक इस स्थिति को स्वीकार किया।
हिंदी फिल्म जगत की जानी-मानी एक्ट्रेस लीसा रे ने अपने कम उम्र में मेनोपॉज का अनुभव और इसकी चपेट में आने के पीछे की वजह का खुलासा किया है। 37 वर्ष की उम्र में ही कीमोथेरेपी के कारण उनके शरीर में मेनोपॉज जैसी स्थितियां उत्पन्न हो गई थीं। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने इस बदलाव के बारे में विस्तार से बात की और बताया कि कैसे इस जानने-समझने का दौर उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। लीसा ने कहा, “मैं 37 साल की उम्र में मेनोपॉज से गुजरीं। इस बदलाव को समझने के लिए मैंने काफी समय तक संघर्ष किया। मेरी कहानी उन महिलाओं की तरह है, जिन्होंने अपने शरीर में आ रहे बदलावों को नजरअंदाज कर दिया। लेकिन अब मैं समझती हूं कि जागरूकता और सही जानकारी कितनी जरूरी है।” उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय स्टडी में पाया गया है कि कम सुविधाओं वाले समुदायों में आधी महिलाओं को मेनोपॉज के बारे में पता ही नहीं है, और 62% महिलाओं को यह भी नहीं पता कि इसका उपचार संभव है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर चर्चा को खुलकर करने की जरूरत पर जोर देते हुए लीसा ने कहा कि चुप्पी तोड़ना और सही जानकारी हासिल करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। लीसा रे का यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि महिलाओं की सेहत के प्रति जागरूकता और इससे जुड़ी समस्याओं का समाधान कितना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “महिलाएं हेल्थकेयर में ज्यादा सवाल कर रही हैं और इन बदलावों को स्वीकार कर रही हैं। हमें अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए हर संभव कदम उठाना चाहिए।”
