उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित भैरव बाबा का एक मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है। यहां भक्त भगवान को फूल-माला या मिठाई नहीं, बल्कि घड़ियां अर्पित करते हैं। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर घड़ी चढ़ाने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
भारत में आस्था से जुड़ी कई अनोखी परंपराएं देखने को मिलती हैं। इन्हीं में से एक अनूठी परंपरा मध्य प्रदेश के एक भैरव मंदिर में निभाई जाती है, जहां श्रद्धालु भगवान को प्रसाद या फूल नहीं, बल्कि घड़ियां अर्पित करते हैं। अपनी इस अनोखी मान्यता के कारण यह मंदिर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से करीब 40 किलोमीटर दूर उन्हेल और महिदपुर के बीच स्थित है। यहां भगवान भैरव की पूजा की जाती है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही दीवारों, रेलिंगों और आसपास के पेड़ों पर टंगी हजारों घड़ियां श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से यहां अपनी मनोकामना मांगता है, उसकी इच्छा पूरी होने पर वह भगवान भैरव को घड़ी अर्पित करता है। माना जाता है कि घड़ी समय का प्रतीक है और इसे चढ़ाने से व्यक्ति का बुरा समय समाप्त होकर अच्छे समय की शुरुआत होती है। बताया जाता है कि वर्षों पहले एक श्रद्धालु ने मनोकामना पूरी होने पर भगवान को घड़ी चढ़ाई थी। इसके बाद यह परंपरा धीरे-धीरे लोकप्रिय होती गई और आज हजारों लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां घड़ियां अर्पित करते हैं। हजारों घड़ियों से सजा यह मंदिर अब आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं और इस अनोखी परंपरा को करीब से देखने का अनुभव प्राप्त करते हैं।
