छतरपुर। केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। उचित मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीण जल, मिट्टी और सांकेतिक फांसी सत्याग्रह के बाद अब चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर पहुंच गया है। उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने विरोध का एक बेहद चौंकाने वाला और अनोखा रास्ता अपनाया है। जल, मिट्टी और सांकेतिक फांसी सत्याग्रह करने के बाद अब प्रदर्शनकारी ग्रामीण जलती चिताओं के समान बनाई गई वेदियों पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। ग्रामीणों के इस कदम से इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
आठवें दिन सुध लेने पहुंचे पन्ना-छतरपुर के अधिकारी- लगातार बढ़ते जनआक्रोश और आंदोलन के आठवें दिन पन्ना व छतरपुर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी आखिरकार आंदोलन स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत कराने और उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीण किसी भी ठोस लिखित वादे से कम पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे।
भू-अर्जन कानून का उल्लंघन, आमरण अनशन का 5वां दिन- आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के आमरण अनशन का आज पांचवां दिन है, जिससे उनका स्वास्थ्य भी लगातार गिर रहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ (भू-अर्जन कानून 2013) के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावितों को बिना पूरा और उचित मुआवजा दिए उनकी जमीन का अधिग्रहण करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और अवैध है।
उच्च-स्तरीय जांच की मांग, आर-पार की लड़ाई का ऐलान- प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने प्रशासन पर नियमों को ताक पर रखकर काम करने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा वितरण और जमीन के सर्वे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, इसलिए इस पूरे मामले की एक उच्च-स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी पूरी मांगें नहीं मान ली जातीं और पूरा मुआवजा बैंक खातों में नहीं आ जाता, तब तक यह आंदोलन और तेज किया जाएगा।
