नेशनल डेस्क। जन्म से दोनों हाथ न होने के बावजूद महाराष्ट्र की माऊली आडूकर ने अपने अदम्य साहस और मेहनत के दम पर वह मुकाम हासिल किया है, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। आज माऊली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं और यह साबित कर चुकी हैं कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

कहते हैं कि मजबूत इरादों के सामने हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले की रहने वाली माऊली आडूकर ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। जन्म से दोनों हाथ न होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी शारीरिक कमी को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। आज वह एक सरकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और अपने संघर्ष व सफलता की कहानी से हजारों लोगों को प्रेरित कर रही हैं। कोल्हापुर जिले के पोर्ले गांव में जन्मीं माऊली जब इस दुनिया में आईं तो उनके दोनों हाथ नहीं थे। समाज के कई लोगों ने उनके भविष्य को लेकर नकारात्मक बातें कहीं और परिवार को उन्हें बोझ समझने तक की सलाह दी। लेकिन उनके पिता और दादी ने हार मानने के बजाय उनका हौसला बढ़ाया और हर कदम पर उनका साथ दिया। परिवार के विश्वास ने माऊली के भीतर आत्मविश्वास की ऐसी लौ जलाई, जिसने उन्हें हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी। माऊली ने अपनी कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने पैरों को ही अपना सहारा बनाया और धीरे-धीरे हर काम पैरों से करना सीख लिया। आज वे पैरों की मदद से लिखती हैं, कंप्यूटर चलाती हैं, खाना बनाती हैं, हार्मोनियम बजाती हैं और सुई में धागा पिरोने जैसे बारीक काम भी आसानी से कर लेती हैं। उनकी यह क्षमता आत्मनिर्भरता और दृढ़ संकल्प की अनूठी मिसाल है। उनके जीवन में कई कठिन पल भी आए। एक समय ऐसा था जब एक स्कूल ने दिव्यांगता के कारण उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। हालांकि एक शिक्षक ने उनका साथ दिया और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्होंने विशेष संस्थान में रहकर पढ़ाई की और अपनी मेहनत के बल पर दसवीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक हासिल किए। शिक्षा के प्रति उनके जुनून ने उन्हें लगातार आगे बढ़ाया। उन्होंने गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक से कंप्यूटर डिप्लोमा किया और पैरों से कंप्यूटर चलाना सीखा। इसके बाद कॉमर्स में स्नातक और मनोविज्ञान में मास्टर्स डिग्री हासिल की। उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाने का था, जिसके लिए उन्होंने कठिन परिश्रम के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। माऊली की मेहनत रंग लाई और उन्होंने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर का पद हासिल किया। हालांकि उनका कहना है कि यह उनकी मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। वे आगे भी प्रशासनिक सेवा में उच्च पद हासिल करने के लिए लगातार तैयारी कर रही हैं। माऊली आडूकर की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो परिस्थितियों के आगे हार मान लेते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा शारीरिक सीमाएं नहीं, बल्कि सोच की सीमाएं होती हैं। उनके संघर्ष और उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि यदि आत्मविश्वास, मेहनत और परिवार का साथ हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
