मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बंधुआ मजदूरी और अमानवीय यातनाओं का सनसनीखेज मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया। इनमें नाबालिग मजदूर भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्हें करीब 11 महीने से बंधक बनाकर रखा गया था।
मुजफ्फरनगर जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के मंडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी के दौरान नाबालिगों समेत 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया। मजदूरों ने फैक्ट्री में अमानवीय यातनाएं दिए जाने और महीनों तक कैद में रखकर जबरन काम कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मुक्त कराए गए मजदूरों ने बताया कि उन्हें अंबाला से अच्छे वेतन, भोजन और बेहतर रोजगार का झांसा देकर फैक्ट्री में लाया गया था। यहां पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए और बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिया जाता था और कई बार 24 घंटे तक भूखा रखा जाता था। भागने से रोकने के लिए फैक्ट्री परिसर में शिकारी कुत्ते तैनात किए गए थे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार के अनुसार मुक्त कराए गए मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों और प्रताड़ना के निशान पाए गए हैं। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे औजार और उपकरण भी मिले हैं जिनका इस्तेमाल मजदूरों को डराने-धमकाने और प्रताड़ित करने में किया जाता था। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि काम में कमी या विरोध करने पर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब फैक्ट्री मालिक की गैरमौजूदगी में एक मजदूर किसी तरह सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर वहां से भाग निकला और पुलिस तक पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री पर छापा मारा और सभी मजदूरों को मुक्त कराया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है तथा फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम और अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।
