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रियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग और तेज दर्द को न करें नजरअंदाज, फाइब्रॉएड का हो सकता है संकेत

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By: सूरज कुमार

On: Tuesday, August 4, 2026 11:19 AM

नेशनल डेस्क। मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, असहनीय दर्द, पेल्विक एरिया में भारीपन और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याओं को सामान्य मानना महिलाओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये लक्षण गर्भाशय फाइब्रॉएड या एडेनोमायोसिस जैसी गंभीर स्त्री रोग संबंधी बीमारियों का संकेत हो सकते हैं।

मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, तेज दर्द, पेल्विक एरिया में दबाव, पेट के निचले हिस्से में भारीपन और बार-बार पेशाब आना जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना महिलाओं के लिए गंभीर साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये गर्भाशय फाइब्रॉएड या एडेनोमायोसिस जैसी स्त्री रोग संबंधी बीमारियों के संकेत हो सकते हैं, जिनका समय पर उपचार जरूरी है।

जयपुर के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि पहले ऐसे मामलों में हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालना) प्रमुख इलाज माना जाता था, लेकिन अब इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की आधुनिक तकनीकों ने गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए इलाज के नए विकल्प उपलब्ध कराए हैं।

उन्होंने बताया कि यूटेरिन आर्टरी एम्बोलाइजेशन (UAE) और माइक्रोवेव एब्लेशन (MWA) जैसी मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से बिना बड़े ऑपरेशन के फाइब्रॉएड का प्रभावी उपचार किया जा सकता है। इन प्रक्रियाओं में बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं होती, खून कम बहता है, अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक ब्लीडिंग, लगातार पेल्विक दर्द, गर्भाशय का बढ़ना या गर्भधारण में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। सही जांच, विशेषकर अल्ट्रासाउंड और एमआरआई के आधार पर ही मरीज के लिए सबसे उपयुक्त उपचार का चयन किया जाता है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि हर मरीज के लिए एक ही इलाज उपयुक्त नहीं होता। उपचार का निर्णय फाइब्रॉएड के आकार, संख्या, स्थान, मरीज की उम्र, भविष्य में मातृत्व की योजना और समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया जाता है। समय पर पहचान और सही उपचार से कई महिलाओं में गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

सूरज कुमार

सूरज कुमार , सिंगरौली, मध्य प्रदेश
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