देहरादून। उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में स्थित तुंगनाथ मंदिर श्रद्धा और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत केंद्र है। समुद्र तल से करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है और पंच केदारों में विशेष स्थान रखता है।

देवभूमि उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में स्थित तुंगनाथ मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में शुमार है और हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। तुंगनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके कपाट पूरे वर्ष खुले नहीं रहते। भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के कारण मंदिर आमतौर पर अप्रैल या मई में खोला जाता है, जबकि अक्टूबर या नवंबर में कपाट बंद कर दिए जाते हैं। सर्दियों के दौरान भगवान शिव की पूजा पास स्थित Makkumath में की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुंगनाथ मंदिर पंच केदारों में प्रमुख स्थान रखता है। माना जाता है कि Pandavas ने महाभारत युद्ध के बाद भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हिमालय में तपस्या की थी, जिससे इस मंदिर का संबंध जुड़ा हुआ है। यह मंदिर केवल श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। मंदिर तक पहुंचने के लिए Chopta से पैदल ट्रेक करना पड़ता है। बर्फ से ढकी चोटियां, हरे-भरे बुग्याल, देवदार के जंगल और बादलों से घिरी घाटियां इस यात्रा को यादगार बना देती हैं। यही कारण है कि चोपता को “मिनी स्विट्जरलैंड” के नाम से भी जाना जाता है। प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के बीच स्थित तुंगनाथ मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य विशेष रूप से मनमोहक होता है, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है।
