ग्वालियर। देश में दहेज उत्पीड़न और नवविवाहित महिलाओं की संदिग्ध मौतों के मामलों पर बहस तेज़ है। Bhopal की ट्विशा शर्मा और Greater Noida की दीपिका के बाद अब ग्वालियर की 21 वर्षीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पलक रजक की मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
की 21 वर्षीय पलक रजक का मामला इसलिए लोगों को झकझोर रहा है क्योंकि इसमें वही पैटर्न दिखता है जो हाल के कई मामलों में सामने आया है: शादी के कुछ महीनों के भीतर दहेज की मांग, अलग-थलग करना, मानसिक प्रताड़ना, “समझौता कर लो” वाला दबाव, और फिर अचानक मौत। पिता को किया गया आख़िरी फोन — “मुझे ले जाओ पापा, नहीं तो ये लोग मार देंगे” — इस पूरे मामले का सबसे भयावह हिस्सा है। ऐसी बातें अक्सर परिवार सुनते हैं, लेकिन भारतीय समाज में शादी बचाने का दबाव इतना गहरा है कि बहुत बार लड़की को वापस उसी माहौल में भेज दिया जाता है। बाद में वही कॉल “संकेत” बनकर रह जाती है। सोशल मीडिया पर उसकी पोस्ट्स और रील्स में Panic Attack, Anxiety, Sleepless Nights, Depression जैसे शब्द दिखना भी महत्वपूर्ण है। लोग अक्सर इन्फ्लुएंसर या रील बनाने वाले व्यक्ति को “खुश” मान लेते हैं, जबकि डिजिटल दुनिया और निजी जीवन के बीच बहुत बड़ा अंतर हो सकता है। कैमरे पर दिखने वाली मुस्कान, वास्तविक मानसिक स्थिति का प्रमाण नहीं होती। कानूनी रूप से ऐसे मामलों में आम तौर पर भारतीय दंड संहिता की दहेज मृत्यु और क्रूरता से जुड़ी धाराएँ लगती हैं। अगर शादी के सात साल के भीतर महिला की असामान्य परिस्थितियों में मौत होती है और दहेज उत्पीड़न के आरोप हों, तो जांच का दायरा गंभीर हो जाता है। लेकिन समस्या सिर्फ़ कानून की नहीं है। असली चुनौती है:
